हिंदी को बढ़ावा देने के लिए यूजीसी ने कसी कमर

Lucknow Updated Sun, 19 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक कार्यों के दौरान हिंदी के प्रयोग को बढ़ावा देने के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने कवायद शुरू की है। केंद्रीय विश्वविद्यालयों में प्रशासनिक कार्यों के दौरान हिंदी के उपयोग की समीक्षा एवं निगरानी के लिए समिति बनायी गयी है। यह सभी विश्वविद्यालयों में हिंदी के उपयोग की स्थितियों पर अपनी रिपोर्ट भी मानव संसाधन विकास मंत्रालय को उपलब्ध कराएगी। यह जानकारी विश्वविद्यालय अनुदान आयोग की उच्च स्तरीय राजभाषा समिति के अध्यक्ष प्रो. वाई. लक्ष्मी प्रसाद ने दी। वह समिति के क्रियाकलापों के संदर्भ में शनिवार को पत्रकारों से बातचीत कर रहे थे।
बाबा साहब भीमराव केंद्रीय विश्वविद्यालय के दौरे पर आए प्रो. प्रसाद ने बताया कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने समिति का गठन किया है। जिसमें गृह मंत्रालय के राजभाषा विभाग के निदेशक, मानव संसाधन विकास मंत्रालय के राजभाषा निदेशक तथा विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के संयुक्त सचिव सदस्य बनाए गए हैं। उन्होंने कहा कि गैर-हिंदी भाषी राज्यों में हिंदी को प्रोत्साहित करने पर सरकार की विशेष नजर है। इसी कड़ी में गैर-हिंदी भाषी क्षेत्र के सभी केंद्रीय विश्वविद्यालयों में विश्वविद्यालय अनुदान आयोग ने हिंदी विभाग खोलने का प्रस्ताव भेजा है। पहले पांच वर्ष तक इस विभाग के सभी खर्च आयोग उठाएगा। इसके लिए एक प्रोफेसर, दो एसोसिएट प्रोफेसर तथा तीन असिस्टेंट प्रोफेसर के पद भी सृजित किए गए हैं। प्रो. प्रसाद ने कहा कि दक्षिण भारत में हिंदी भाषा सीखने का चलन तेजी से बढ़ा है लेकिन उत्तर भारत जो हिंदी का मूल क्षेत्र है वहीं पर इसके लेखन एवं बोलचाल में गिरावट देखने को मिल रही है।

बीबीएयू में बेहतर नहीं हिंदी का हाल
बाबा साहब भीमराव अंबेडकर विश्वविद्यालय में भी प्रशासनिक कामकाज में हिंदी के उपयोग की स्थिति काफी खराब है। समिति ने कई स्तर पर खामियां पाईं। इसमें सुधार के लिए अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं। समिति की ओर से यह भी सवाल आया कि हिंदी भाषा के मुख्य क्षेत्र में मौजूद इस विश्वविद्यालय में अब तक हिंदी विभाग क्यों नहीं है? इस पर विश्वविद्यालय अधिकारियों ने बताया कि 12वीं पंचवर्षीय योजना के अंतर्गत हिंदी विभाग खोलने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग को प्रस्ताव भेजा गया है। समिति ने बीबीएयू प्रशासन को हिंदी को प्रशासनिक कामकाज में पूर्ण रूप से लागू करने के लिए भी समयबद्ध कार्यक्रम दिया है जिसका विश्वविद्यालय को अनुपालन होगा। समिति अब तक बीस विश्वविद्यालयों का निरीक्षण कर चुकी है।

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