पहले चरण में लगेंगे ढाई लाख वाटर मीटर

Lucknow Updated Sat, 18 Aug 2012 12:00 PM IST
लखनऊ। पेयजल वितरण व्यवस्था के निजीकरण की ओर जल निगम ने एक बड़ा कदम बढ़ा दिया है। वाटर मीटर सिस्टम का प्रस्ताव पास करने के बाद अब इसे अमली जामा पहनाने की कवायद शुरू कर दी गई है। मीटर लगाने के लिए निजी कंपनियों से निविदा मांगी गई है। पहले चरण में राजधानी में करीब ढाई लाख मीटर लगाए जाने हैं। टेंडर, प्री-बिड और फाइनेंशियल बिड के बाद नवंबर तक मीटर लगाने वाली कंपनी तय की जाएगी। मीटर लगने के बाद शहर की जनता को जितना पानी मिलता है, उतना बिल देना पड़ेगा। जल निगम ने टेंडर आमंत्रण की सूचना जारी कर दी है। इसके तहत 25 अगस्त से निविदा पत्र बेचे जाएंगे। निविदा जमा करने की अंतिम तिथि 5 सितंबर होगी। छह अगस्त को टेक्निकल बिड खोली जाएगी। मीटर लगाने के लिये चार एजेंसियां मिलकर काम करेंगी। सबसे बड़ा काम जल निगम के पास होगा, जो कि मीटर लगवाएगा। इसके बाद जल संस्थान मीटर की मेंटेनेंस और बिलिंग का काम देखेगा। पानी की रेट नगर निगम का सदन और अधिकारी मिल कर तय करेंगे। चौथी एजेंसी वह निजी कंपनी होगी जो कि इस पूरे काम को अपने कर्मचारियों के जरिये करवाएगी। जल निगम ने जो प्रोजेक्ट बनाया है उसके मुताबिक पूरी राजधानी को अगले दो साल में 24 घंटे लगातार जलापूर्ति की जाएगी। पानी की बर्बादी रोकने के लियेे मीटर के जरिये बिलिंग की जायेगी। मीटर की खरीद और बिल वसूली का काम निजी कंपनी करेगी। पांच वर्ष तक इसका मेंटेनेंस भी कंपनी के हाथ में होगा। इसके लिये तय धनराशि कंपनी को दी जाएगी। जबकि बिल की रकम सरकार के खाते में जाएगी। इस पूरे प्रोजेक्ट का बजट जल्द ही तय कर दिया जाएगा। जेएनएनयूआरएम के तहत राजधानी की पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने की कोशिशें चल रही हैं। इसके तहत कठौता में तीसरा वाटर वर्क्स लगाया गया। बालागंज जलकल की क्षमता दुगुना की गई। दर्जनों नए ओवरहेड टैंक और सैकड़ों किलोमीटर लंबी पाइप लाइन बिछाई गई है। इससे राजधानी की जलापूर्ति पर अगले कुछ समय में असर पड़ेगा और अधिक समय के लिए लोगों को पानी मिल सकेगा। जल निगम ने इस व्यवस्था का पूरा प्रारूप अपनी वेबसाइट पर डाल दिया है। इसमेेें जो भी सलाहें आएंगी, उसके हिसाब से कुछ बदलाव कर अगले तीन से चार दिन में टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
2014 तक चौबीस घंटे पानी: वर्ष 2014 तक राजधानी को 24 घंटे पानी की सप्लाई दी जानी है। इसलिए जल निगम, जल संस्थान, नगर निगम और निजी कंपनी मिल कर काम करेंगे। उम्मीद जताई जा रही है कि इस व्यवस्था से पानी की बर्बादी रुकेगी और खर्च के सापेक्ष आय भी होगी।
दिल्ली की तर्ज पर हो सकते हैं शुल्क : राजधानी में पानी के रेट दिल्ली की तर्ज पर तय किए जा सकते हैं। हालांकि राष्ट्रीय राजधानी और लखनऊ की दरों में थोड़ा अंतर हो सकता है।

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