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...फिर भी खाली रह गयीं बीटेक की 70 हजार सीटें

Lucknow Updated Mon, 13 Aug 2012 12:00 PM IST
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लखनऊ। प्रदेश के इंजीनियरिंग, मैनेजमेंट, फॉर्मेसी आदि पाठ्यक्रमों में दाखिले की कमान अब सीधे कॉलेजों के हाथ होगी। रविवार को सेकेंड काउंसलिंग खत्म हो गयी। इसके बाद भी बीटेक, एमबीए, बीफॉर्मा, एमसीए आदि पाठ्यक्रमों की दो तिहाई सीटें खाली रह गयीं। एसईई से सीटें नहीं भरने पर अब गेंद कॉलेजों के पाले में डाल दी गयी है।
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बीटेक की 70 हजार से अधिक सीटों पर कॉलेजों को दावेदार ढूंढना होगा। सीधे दाखिले के लिए शासनादेश पहले ही जारी हो चुका है। सेकेंड काउंसलिंग के अभ्यर्थियों को 16 अगस्त तक रिपोर्ट करना है। इसके बाद 17 अगस्त से कॉलेज सीधे दाखिला ले सकेंगे। कॉलेजों के लिए आखिरी तिथि 6 सितम्बर निर्धारित की गई है।

प्रदेश के इंजीनियरिंग एवं मैनेजमेंट कॉलेजों में दाखिले के लिए काउंसलिंग 14 जुलाई से शुरू हुयी थी। सबसे पहले काउंसलिंग की शुरुआत बीटेक से हुयी। प्रदेश में बीटेक की करीब 1लाख 33 हजार 400 सीटे हैं। इसमें से बीस फीसदी सीटें ऑल इंडिया इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम (एआईईईई) के जरिए जबकि पंद्रह फीसदी मैनेजमेंट कोटे के जरिए भरी जानी थी।

एआईईईई की 26 हजार 700 सीटों के लिए हुयी काउंसलिंग में महज साढ़े चार हजार सीटें ही भर पाईं। ऐसे में इसकी भी साढ़े बाइस हजार खाली सीटें भी एर्सईई में शामिल हो गयीं। इस तरह मैनेजमेंट कोटा निकालने के बाद लगभग बीटेक की 1.08 लाख सीटें बची थीं। इनकी काउंसलिंग होनी थी।

पिछली बार की अपेक्षा एसईई का रिजल्ट बेहतर होने के कारण क्वालीफाइंग अभ्यर्थियों की संख्या 1.30 लाख के आस-पास है जो पिछली बार से करीब 48 हजार अधिक हैं। इसलिए आयोजक भी प्रवेश के आंकड़े सुधरने की उम्मीद लगाए बैठे थे, लेकिन उम्मीदें टूट गयीं।

सैंतीस हजार सीटें ही भरीं : बीटेक की प्रथम चरण की काउंसलिंग समाप्त होने के बाद महज साढ़े बत्तीस हजार सीटें ही भर पायीं। इसमें एआईईईई के जरिए हुए साढ़े चार हजार प्रवेश को भी जोड़ दिया जाए तो कुल 37 हजार सीटों पर ही प्रवेश हो पाए। वहीं एमबीए में भी 28 हजार से अधिक सीटें खाली रह गयी थी। सौ से अधिक कॉलेजों का खाता तक नहीं खुल पाया। इसके बाद आरक्षित संवर्ग की विशेष काउंसलिंग हुयी। इसके बाद भी जो सीटें बची उन्हें सामान्य संवर्ग में कनवर्ट करके सेकंड काउंसलिंग आयोजित की गयी। सेकंड काउंसलिंग में भी बीटेक की सीटों का आंकड़ा मामूली ही सुधरा और लगभग 70 हजार सीटें खाली रह गयीं। वहीं एमबीए में भी 26 हजार से अधिक सीटें खाली हैं।
कॉलेजों की बल्ले-बल्लेः आरक्षित संवर्ग की खाली सीटें जनरल में परिवर्तित होने के चलते प्राइवेट कॉलेजों में एडमिशन लेने वाले बहुत से छात्रों ने और अच्छे कॉलेजों का रुख कर लिया। इसके चलते जीरो दाखिले वाले निजी कॉलेजों की संख्या में और इजाफा हो गया है। अब इन कॉलेजों का भविष्य प्रवेश परीक्षा के समय बनाए छात्रों के रजिस्ट्रेशन बैंक और अधिक से अधिक छात्र लाने की काबिलियत पर निर्भर हो गया है। सीधे दाखिले में कॉलेजों को काफी आजादी मिली हुयी है। कॉलेज ऐसे अभ्यर्थी जो एसईई में शामिल नहीं हुए हैं लेकिन वह इंजीनियरिंग या मैनेजमेंट में दाखिले की योग्यता पूरी करते हैं उनका भी प्रवेश ले सकेंगे। काउंसलिंग आयोजित कर रहे गौतम बुद्घ प्राविधिक विश्वविद्यालय ने बीटेक में सीधे दाखिले के लिए इंटरमीडिएट में 60 फीसदी की अनिवार्यता करके लगाम कसने की कोशिश की थी लेकिन शासन ने उसे घटाकर पूर्व की भांति 50 फीसदी कर दिया। ऐसे में अब कॉलेजों की बल्ले-बल्ले है।

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