नए साल में देश के पांच बड़े बैंकों की तरफ से आपको बुरी खबर मिल सकती है। केंद्र सरकार और रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के दिशा-निर्देशों का अगर ये बैंक पालन करते हैं, तो फिर इसका असर न केवल इन बैंकों के ग्राहकों बल्कि यहां काम कर रहे कर्मचारियों भी देखने को मिलेगा।
वित्त मंत्रालय ने दिया है बैंकों को आदेश
वित्त मंत्रालय ने सोमवार को सभी सार्वजनिक बैंकों को आदेश दिया है कि वो घाटे में चल रही अपनी सभी शाखाओं को बंद करें ताकि ऑपरेशनल कॉस्ट में कमी की जा सके। केंद्रीय वित्त मंत्रालय ने सुधार प्रक्रिया के तहत वित्तीय हालत सुधारने के लिए सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों से अपनी घरेलू व विदेशी शाखाओं का पुनर्गठन करने के लिए कहा है।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि पूंजी बचाने के अभ्यास के तहत बैंकों से घाटे में रहने वाली घरेलू तथा विदेशी शाखाओं को बंद करने के लिए कहा गया है। सूत्रों ने कहा कि नुकसान वाली शाखाओं के संचालन का कोई मतलब नहीं बनता और ये बैलेंस शीट के लिए भार हैं।
इन बैंकों पर पड़ेगा असर
आईओबी ने घटाए अपने रीजनल ऑफिस
इंडियन ओवरसीज बैंक ने अपने रीजनल ऑफिस की संख्या को 59 से घटाकर के 49 कर दिया है। इससे उनके एडमिन के खर्चों में काफी कटौती हो गई है। बैंक अपनी कई शाखाओं को भी बंद करने जा रहा है। एसबीआई और पीएनबी भी अपने कई ब्रांचों को बंद कर चुके हैं। पीएनबी अपनी यूके की सब्सिडियरी पीएनबी इंटरनेशनल बैंक में अपनी स्टेक को बेचने की सोच रहा है।
बैंक ऑफ बड़ौदा की 24 देशों में ब्रांच
बैंक ऑफ बड़ौदा की 24 देशों में 107 ब्रांच और ऑफिस हैं। इनमें से भी कई ब्रांच अब बंद की जाएंगी। एसबीआई के भी 36 देशों में 195 ब्रांच हैं।
खाते बंद होने पर लोगों पर पड़ेगा ये असर
अगर बैंक अपनी घाटे वाली ब्रांचों को बंद कर देंगे, तो इनके खाते पास में स्थित दूसरी ब्रांचों में ट्रांसफर कर दिए जाएंगे। इससे बैंक कस्टमर की चेक बुक, आईएफएससी कोड सभी बदल जाएंगे। इससे बैंक में फंड ट्रांसफर करने वालों को दिक्कतों का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही सेविंग के अलावा अन्य सभी अकाउंट्स पर भी असर पड़ेगा।