हिंदी देश में 'नेतागिरी' की भाषा, ट्रंप भी अपनाने को हुए मजबूर

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली Updated Mon, 24 Feb 2020 05:33 PM IST
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भारत दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं मेलानिया ट्रंप
भारत दौरे पर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप एवं मेलानिया ट्रंप - फोटो : PTI (फाइल)

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सार

  • ट्रंप ने ट्वीट में लिखा, अमेरिका और भारत अपने देशों को मजबूत बनाएंगे
  • अमेरिका भारत को  प्रेम करता है, अमेरिका भारत का सम्मान करता है

विस्तार

अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप दो दिवसीय भारत यात्रा पर हैं। लेकिन भारत की जमीन पर उतरने से पहले ही हिंदी में ट्वीट कर देश का दिल जीत लिया। उन्होंने कहा कि हम भारत आने के लिए उत्सुक हैं। हम रास्ते में हैं, कुछ ही घंटों में हम सब मिलेंगे।
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वहीं ट्रंप यहीं नहीं रुके। मोटेरा स्टेडियम में लोगों को संबोधित करने के समय भी उन्होंने कहा कि वे इस देश के लोगों से मिलने के लिए 8000 मील का चक्कर लगाकर आये हैं।

कुछ ही पलों में ट्रंप के ये ट्वीट सोशल मीडिया की सुर्खियां बन गए। हिंदी के विद्वान भी ट्रंप के हिंदी ट्वीट को लेकर बहुत उत्साहित हैं। उनका मानना है कि इस तरह के प्रतीकों से हिंदी जीतती है और उसका प्रभाव बढ़ता है। 
 
हिंदी के प्रसिद्ध व्यंगकार आलोक पुराणिक ने ट्रंप के ट्वीट पर टिप्पणी करते हुए कहा कि हिंदी हिंदुस्तान में नेतागिरी की भाषा है। हमारे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी हों, कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी हों या विदेश के नेता ट्रंप हों, अगर किसी नेता को हिंदुस्तान के दिल को छूना है तो उसे हिंदी तक पहुंचना ही पड़ेगा।
लगभग आधा हिंदुस्तान आधिकारिक रूप से हिंदी बोलता है और लगभग पूरा हिंदुस्तान इसे समझता है। ऐसे में अगर भारत से आत्मीय संपर्क बनाना है, तो हिंदी की ताकत को स्वीकार करना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि अकसर राष्ट्राध्यक्ष दूसरे देशों की भाषाओं में ट्वीट कर उनसे नजदीकी सम्बंध बनाने की कोशिश करते हैं और ट्रंप के ट्वीट को इसी नजरिये से देखा जाना चाहिए। 
 
हिंदी भाषा के विद्वान सुभाष चंद्र ने कहा कि कुछ लोगों को हिंदी एक कमजोर होती हुई भाषा दिखाई पड़ती है, लेकिन ट्रंप के ट्वीट और उस पर हो रही टिप्पणी को देखकर समझ आ जाना चाहिए कि हिंदी में दूसरों को अपने तक खींचने की ताकत है।

इस तरह के प्रतीकों से हिंदी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता बढ़ती है। अगर सरकार इसे रोजगार से ज्यादा मजबूती के साथ जोड़ने के लिए जमीनी बदलाव करे तो इससे बड़ा परिवर्तन आ सकता है। इससे न सिर्फ हिंदी को ताकत मिलेगी, बल्कि इससे हिंदी भाषियों का आर्थिक विकास भी होगा। 
 
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