लॉकडाउन में वीडियो विज्ञापन में निवेश रहा कारगर, मिला शानदार रिटर्न

टेक डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: प्रदीप पाण्डेय Updated Thu, 07 Jan 2021 05:03 PM IST
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Video Ads - फोटो : PIXABAY
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लॉकडाउन के दौरान उपभोक्ताओं से जुड़ने के लिए वीडियो पर खर्च करने से निवेश पर ज्यादा रिटर्न मिली। ऑक्टेन रिसर्च एवं डीएमए एशिया द्वारा जारी एक रिपोर्ट डिजिटल 2021: अडैप्टिंग टू द न्यू नॉर्मल में यह बात सामने आई है। ऑक्टेन रिसर्च ने अपने अनुसंधान के तहत भारत के 250 से अधिक अग्रणी चीफ मार्केटिंग ऑफिसर्स (सीएमओ) और लीडर्स के साथ सर्वेक्षण किया और कोविड-19 के प्रभाव जानने की कोशिश की। डीएमए एशिया अब प्रगतिशील एवं बहादुर विपणकों का सबसे बड़ा समुदाय है। 
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रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 62 फीसदी सीएमओ ने बताया कि कन्ज्यूमर आउटरीच के लिए वीडियो पर खर्च करने से निवेश पर ज्यादा रिटर्न मिलता है। "डिजिटल उद्योग एवं स्ट्रीमिंग वीडियो प्लेयर्स जैसे नेटफ्लिक्स, अमेजन, फेसबुक, यूट्यूब आदि ने अपनी वीडियो क्वालिटी को एसडी के लिए बेहतर बनाने का फैसला लिया। उपभोक्ताओं के हितों को ध्यान में रखते हुए यह पहल की गई ताकि वे सशक्त सैल्युलर नेटवर्क के जरिए बेहतर इंटरनेट का लाभ उठा सकें। ऑक्टेन की दसवीं सालगिरह पर प्रकाशित ऑनलाइन मार्केटिंग रिपोर्ट में बताया गया।


 रिपोर्ट में कहा गया है कि वीडियो उपभोक्ताओं के लिए सबसे महत्पूर्ण प्रकार का कंटेंट हैं जो उन्हें सबसे ज्यादा आकर्षित करता है। मार्केटर्स ने बताया कि लाइव स्ट्रीमिंग के साथ वीडियो ने उनके ब्राण्ड पर उपभोक्ताओं को सबसे ज्यादा आकर्षित किया है। सोशल मीडिया भी उपभोक्ताओं को लुभाने में अग्रणी रहा है। उपभोक्ताओं को लुभाने वाले शीर्ष पायदान के 5 चैनलों की बात करें तो ब्लॉग और इमेल कैम्पेन इनमें शामिल हैं। इसके अलावा प्रोमोशन और पारम्परिक एसएमएस के माध्यम से अपडेट्स भी शीर्ष पायदान के 5 चैनलों में आते हैं।

भारत में कंटेंट मार्केटिंग ने मार्केटर्स के बजट में अपने लिए अलग से जगह बना ली है। प्रभावी कंटेंट मैनेजमेन्ट प्रथाओं से ऑनलाईन माध्यमों को बढ़ावा मिलता है और उम्मीद है कि 2021 में इसमें बढ़ोतरी होगी। वीडियो उपभोक्ताओं के लिए सबसे आकर्षक प्रकार का कंटेंट बना हुआ है। यह निवेश पर बहुत अच्छा रिटर्न देता है, 61.8 फीसदी उत्तरदाताओं के अनुसार वे वीडियो और वेबिनार्स के लिए कंटेंट मार्केटिंग रणनीतियों का उपयोग करते हैं। 

रिपोर्ट में बताया गया कि न्यूट्रेला का वीडियो #अच्छा क्या हुआ, जिसे न्यूनतम बजट के साथ प्रोमोट किया गया, इसे लॉकडाउन के दौरान फेसबुक पर आधे मिलियन से ज्यादा व्यूज़ मिले। "लॉकडाउन के दौरान लोगों का आना जाना बेहद सीमित हो गया, ऐसे में कंपनियों ने बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचने के लिए डिजिटल माध्यमों को अपनाया, जो इस बात की पुष्टि करता है कि यह रणनीति कारगर साबित हुई है।" पुनीत मोधगिल, चीफ रीसर्च ऑफिसर, ऑक्टेन रीसर्च ने कहा।

रिपोर्ट के मुताबिक भारत के 51 फीसदी सीएमओ ने स्वीकार किया कि वे मार्केटिंग प्रोमेशन एवं उपभोक्ताओं को लुभाने के लिए ब्राण्डेड पेज, माइक्रोसाईट और सोशल मीडिया हैण्डल्स का उपयोग करते हैं। प्रोमोशनल माइक्रोसाईट्स उपभोक्ताओं का ध्यान आकर्षित करने में बेहद कारगर होती हैं । वे विशेष प्रोमोशनल कंटेंट को उपभोक्ताओं तक पहुंचाने का बेहतरीन माध्यम हैं । भारत के सीएमओ अपने फॉलोवर्स तक पहुंचने के लिए अपने ब्राण्ड के सोशल मीडिया हैण्डल्स का उपयोग करते हैं। वे अपनी प्रतिभा के प्रदर्शन तथा अपने ब्राण्ड की कहानी को दर्शकों तक पहुंचाने के लिए इंस्टाग्राम और ट्विटर हैण्डल का उपयोग करते हैं। ब्राण्ड 'कोनवर्स ने भी उपभोक्ताओं के साथ नए तरीकों से जुड़ने के लिए एक अभियान का संचालन किया।

जहां तक ईमेलर्स और न्यूज़लैटर्स का सवाल है अध्ययन में हिस्सा लेने वाले भारत के 43 फीसदी सीएमओ ने ईमेल को निवेश पर रिटर्न के प्रभाव की दृष्टि से तीसरे स्थान पर रखा। कैम्पेन मोनिटर के अनुसार, ईमेल के लिए खुली दर मार्च में 16 फीसदी बढ़ी और ईमेल भेजने में 19 फीसदी बढ़ोतरी हुई। साल 2020 भारत के मार्केटर्स के लिए एक प्रभावशाली वर्ष रहा, इनमें से ज्यादातर मार्केटर्स 2021 में इन्फ्लुएन्सर मार्केटिंग प्रोग्राम में निवेश की योजना बना रहे हैं, क्योंकि यह उपभोक्ताओं के साथ जुड़ने और उनमें जागरुकता बढ़ाने का प्रभावी माध्यम है। सेलब्रिटीज़ भी अपने प्रशंसकों के साथ जुड़े रहने के लिए नियमित रूप से इंस्टाग्राम लाईव सत्रों का संचालन करते हैं । 

इसके अलावा बड़ी संख्या में बीएफएसआई (बैंकिंग, वित्तीय सेवा एवं बीमा) तथा ई-वॉलेट ब्राण्ड्स ने लॉकडाउन के दौरान अपनी सेवाओं के बारे में उपभोक्ताओं तक जानकारी पहुंचाने के लिए इफ्लुएन्सर्स का उपयोग किया। 88 फीसदी प्रतिभागियों ने बताया कि वे अगले 12 महीनों में इन्फ्लुएन्सर मार्केटिंग का उपयोग करेंगे क्योंकि "उपभोक्ता ब्राण्ड के द्वारा उनके विज्ञापनों में कही गई बात के बजाए इन्फ्लुएन्सर की बात पर अधिक भरोसा करते हैं।" 33 फीसदी सीएमओ ने बताया कि वे लॉयल्टी प्रोग्राम्स पर सीज़नल कैम्पेन संचालित करना चाहेंगे और इतने ही सीएमओ ने ऐसी अल्पकालिक पहलों के आयोजन की इच्छा जताई ।

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