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नेट न्यूट्रैलिटी: कब, कहां और कैसे शुरू हुई इंटरनेट की आजादी पर बहस

टेक डेस्क, अमर उजाला Updated Thu, 12 Jul 2018 01:03 PM IST
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इंटरनेट के इस्तेमाल में किसी भी प्रकार के भेदभाव नहीं करने को लेकर दूरसंचार विभाग ने बुधवार को नेट न्यूट्रैलिटी पर सिफारिशों को मंजूरी दे दी है। इस मंजूर के बाद इंटरनेट पर किसी भी सर्विस के लिए एक ही शुल्क लिया जाएगा। सरकार के इस फैसले ने भारतीय मोबाइल और इंटरनेट यूजर्स को बड़ी राहत दी है। अब नेट न्यूट्रैलिटी को लेकर आपके जेहन में कुछ सवाल भी होंगे। जैसे- नेट न्यूट्रैलिटी यानि इंटरनेट की आजादी पर कब, कहां और कैसे बहस शुरू हुई। आइए जानते हैं।
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सबसे पहले आपको बता दें कि नेट न्यूट्रैलिटी (नेट निरपेक्षता) शब्द का इस्तेमाल पहली बार कोलंबिया यूनिवर्सिटी के मीडिया लॉ प्रोफेसर टिम वूइन ने साल 2003 में किया। उस दौरान उन्होंने नेट न्यूट्रैलिटी का इस्तेमाल टेलीफोन के लिए किया था। 

फेसबुक ने भी नेट न्यूट्रैलिटी को फ्री बेसिक्स (इंटरनेट डॉट ओआरजी) के नाम से भारत में शुरू करने की कोशिश की थी लेकिन विरोध और सरकार के हस्तक्षेप के बाद फेसबुक को यह सेवा बंद करनी पड़ी। वहीं फेसबुक को इंटरनेट डॉट ओआरजी के साथ नेट न्यूट्रैलिटी के नियमों के उल्लंघन का आरोप भी लगा था।

ये भी पढ़ेंः आखिर क्या है नेट न्यूट्रैलिटी और क्यों है यह जरूरी, विस्तार से समझें

वहीं फेसबुक का तर्क था कि वह फ्री बेसिक्स के जरिए वह भारत के ग्रामीण इलाकों में रहने वालों लोगों तक फ्री में इंटरनेट पहुंचाने की कोशिश कर रहा है। फेसबुक ने फ्री बेसिक्स के लिए के रिलायंस कम्युनिकेशंस के साथ करार भी किया था जिसके तहत यूजर्स को फ्री में फेसबुक चलाने की सुविधा मिली थी।

भारत में 2017 में शुरू हुई बहस
भारत में नेट न्यूट्रैलिटी पर पिछले साल दिसंबर में तब बहस हुई जब एयरटेल ने इंटरनेट कॉलिंग के लिए 3G यूजर से पैसे वसूलने की बात कही थी। इसके बाद इसी साल जनवरी में ट्राई ने लोगों से 20 सवाल पूछे गए जो कि व्हॉट्सऐप, स्नैपचेट, फेसबुक मैसेंजर जैसे सोशल मीडिया ऐप से जुड़े थे।

अमेरिका जैसे देशों में बना है नेट न्यूट्रैलिटी पर कानून
साल 2010 में नेट न्यूट्रैलिटी पर सबसे पहले चिली ने कानून बनाया था। उसके बाद नीदरलैंड ने भी कानून बनाया और फिर 2012 में दक्षिण कोरिया ने भी इसे लेकर अपना कानून तैयार किया। इसके अलावा अमेरिका में भी 2015 में नेट न्यूट्रैलिटी पर कानून बनाए गए।

एक उदाहरण से समझें नेट न्यूट्रैलिटी
उदहारण के तौर पर मान लीजिए कि आप किसी होटल में खाने गए हैं और होटल वाला आपसे बैठने की चेयर के लिए अलग से पैसे, मांगे, टेबल के लिए अलग से पैसे मांगे और फिर हाथ धोने के लिए भी अलग से पैसे मांगे।

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21 सितंबर 2018

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