'इंटरनेट की आजादी को खतरा'

Samarth SaraswatSamarth Saraswat Updated Sun, 24 Nov 2013 08:52 AM IST
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Internet monitoring and censorship is threat

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इंटरनेट के जनक कहे जाने वाले सर टिम बर्नर्स ली ने चेतावनी दी है कि वेब जगत के लोकतांत्रिक स्वरूप को 'निगरानी और सेंसरशिप के बढ़ते चलन' से खतरा है।
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वर्ल्ड वाइड वेब की सालाना वेब इंडेक्स रिपोर्ट को जारी करते वक्त टिम ने ये बात कही। इस रिपोर्ट में दुनिया भर में हो रही सेंसरशिप की घटनाओं को देखा गया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि सूची में शामिल 94 फीसदी देश इंटरनेट पर की जा रही सरकारी एजेंसियों की दख़लंदाजी पर ज़रूरी निगरानी नहीं रखते।
रिपोर्ट में इस बात की ओर भी इशारा किया गया है कि 30 फीसदी देश राजनीतिक रूप से संवेदनशील आँकड़ों को या तो ब्लॉक कर देते हैं या फिर फिल्टर कर देते हैं।

रिपोर्ट के अंत में सरकारी संस्थाओं की ओर से की जाने वाली जासूसी से जुड़े मौजूदा कानूनी प्रावधानों पर पुनर्विचार किए जाने की जरूरत बताई गई है।

टिम ने कहा, "इस साल के वेब इंडेक्स की सबसे उत्साहित करने वाली बात ये है कि इंटरनेट और सोशल मीडिया किस तरह से लोगों को संगठित होने, कार्रवाई करने और दुनिया में जहाँ कहीं भी कुछ ग़लत हो रहा है, उसे सामने लाने के लिए प्रेरित कर रहे हैं।"

"लेकिन कुछ सरकारें इससे डरी हुई हैं। निगरानी और सेंसरशिप के ज़रिए अब लोकतंत्र के भविष्य को डराया जा रहा है। अभिव्यक्ति की आजादी और निजता के मौलिक अधिकार को बचाने के लिए कड़े कदम उठाने की जरूरत है।"

'डरावना और मूर्खतापूर्ण'

टिम 'व्हिसल-ब्लोअर' एडवर्ड स्नोडेन के विकीलिक्स वाले रहस्योद्घाटन के बाद की गई सरकारी निगरानी की कड़ी आलोचना करते रहे हैं।

इंटरनेट पर कूटभाषा में मौजूद सूचना का पता लगाने के लिए खुफिया एजेंसियों की तरफ से की जाने वाली गतिविधियों को टिम बर्नर्स ने 'डरावना और मूर्खतापूर्ण' हरकत करार दिया।

इससे पहले उन्होंने कहा था कि ब्रिटेन और अमरीका की ख़ुफिया एजेंसियों को संतुलन बनाए रखने की ज़रूरत है और राष्ट्रीय सुरक्षा एजेंसी (एनएसए) इसमें नाकाम रही है।

डिजिटल फॉरेंसिक विज्ञान के जानकार प्रोफेसर पीटर सॉमर ने भी इससे सहमति जताई थी।

उन्होंने कहा, "जीसीएचक्यू एक खुफिया संस्था है। उसे अच्छे नतीजे देने की जरूरत थी। लेकिन अभी तक जितना लोग समझते हैं कि उनके द्वारा इस्तेमाल की जा रही तकनीक कहीं अस्पष्ट हैं।"

"जो चीजें वे लोग कर रहे हैं, उसके लिए मंत्रियों के आदेश की जरूरत होती है लेकिन मंत्रियों के पास कई और चीजें हैं करने के लिए। क्या उनमें तकनीक को लेकर पूरी समझदारी है? खतरे का आकलन कौन कर रहा है?"

कैबिनेट के एक प्रवक्ता ने बीबीसी से कहा, "हमारी खुफिया एजेंसियों की कामयाबी उनकी गोपनीयता पर निर्भर करती है। और गोपनीयता का मतलब ग़ैर ज़िम्मेदाराना रवैया अपनाना नहीं है।

ब्रिटेन की खुफिया एजेंसियाँ सख्त नियंत्रण और निगरानी में काम करती हैं।"
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