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सोशल मीडिया अकाउंट आधार से लिंक होंगे या नहीं, जनवरी में सुप्रीम कोर्ट में होगी सुनवाई

टेक डेस्क, अमर उजाला Published by: अजय वर्मा Updated Tue, 22 Oct 2019 01:00 PM IST

सार

  • सोशल मीडिया: निजता की आड़ में राष्ट्रहित को खतरा-केंद्र
  • सोशल मीडिया को आधार से जोड़ने से जुड़े सभी मामले में सुप्रीम कोर्ट में स्थानांतरित
  • सुप्रीम कोर्ट जनवरी में एक साथ करेगा सुनवाई, सोशल मीडिया की गाइडलाइन तय करने को कहा
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प्रतीकात्मक तस्वीर
प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : pxhere.com
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विस्तार

आज के दौर सभी लोग सोशल मीडिया (Social Media) प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल करते हैं। साथ ही इस प्लेटफॉर्म ऐसे कंटेंट पोस्ट किए जाते हैं, जो देश के खिलाफ होते हैं। वहीं अब सोशल मीडिया प्रोफाइलों को आधार से जोड़ने संबंधी लंबित मामलों को अपने पास स्थानांतरित किया है। सोशल मीडिया के दुरुपयोग को रोकने के लिए सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होगी। सुनवाई जनवरी 2020 के आखिरी सप्ताह में हो सकती है। बता दें कि सोशल मीडिया अकाउंट को आधार से जोड़ने से संबंधित याचिकाएं मद्रास, मध्य प्रदेश और बॉम्बे हाई कोर्ट में लंबित थीं।
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अब भारत सरकार नए साल की शुरुआत में ही सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच को फैलाने वालों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करने जा रही है। दरअसल, मिनिस्ट्री ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड इंफॉर्मेशन यानी एमईआई ने सोशल मीडिया साइट्स पर रोक लगाने के लिए सुप्रीम कोर्ट में एफिडेविट दायर किया है। इस एफिडेविट में कहा गया है कि सोशल साइट्स पर हेट स्पीच समेत अन्य कार्यों पर लगाम लगाने के लिए नियम बनाए जाएं, जिससे यह प्लेटफॉर्म सुरक्षित और बेहतर बन सके।

भारत सरकार ने अपने एफिडेविट में कहा है कि हम फेसबुक, इंस्टाग्राम और टविटर जैसे प्लेटफॉर्म पर पोस्ट किए गए कंटेंट को लेकर विचार कर कर रहे है कि इसका जिम्मेदार सोशल मीडिया प्रोवाइडर है या नहीं। इसके साथ ही सरकार ने आगे कहा है कि हम सोशल मीडिया के लिए 15 जनवरी 2020 से नए नियम लेकर आएंगे और साथ ही प्रोवाइडर्स को भी इसकी जानकारी देंगे।

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रिपोर्ट्स के अनुसार, टेक्नोलॉजी और सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ने देश के विकास में अपना अहम योगदान दिया है। वही दूसरी तरफ इन प्लेटफॉर्म पर हेट स्पीच, फर्जी खबर, पब्लिक ऑर्डर और देश विरोधी गतिविधियां भी देखने को मिली हैं। बता दें कि सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस दीपक गुप्ता और जस्टिस अनिरुद्ध बोस ने सरकार को तीन सप्ताह के भीतर सोशल मीडिया के लिए नए गाइडलाइन लाने को कहा था। 

सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि सोशल मीडिया कंपनी किसी भी फेक न्यूज की पहचान नहीं कर पाती हैं। वहीं, भारत सरकार को इस स्थिति को ध्यान में रखकर समाधान निकालना होगा। इसके साथ ही सोशल मीडिया की सुरक्षा के लिए पब्लिक इंटरेस्ट लिटिगेशन कोर्ट में दर्ज किए जा चुके हैं। 
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