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नई गाइडलाइन: क्या सरकार आपके मैसेज पढ़ेगी, व्हाट्सएप क्यों डर रहा है, साइबर एक्सपर्ट से समझें

pradeep pandey प्रदीप पाण्डेय
Updated Sat, 29 May 2021 08:41 PM IST

सार

व्हाट्सएप को डर है कि उसके यूजर्स किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे जिससे उसका बड़ा नुकसान हो जाएगा। सरकार की पॉलिसी साइबर क्राइम को खत्म करने के लिए है लेकिन व्हाट्सएप को अपने बिजनेस के खत्म होने का डर सता रहा है।
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whatsapp: नई गाइडलाइन पर एक्सपर्ट की राय
whatsapp: नई गाइडलाइन पर एक्सपर्ट की राय - फोटो : amarujala
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विस्तार

सोशल मीडिया की नई गाइडलाइन को लेकर व्हाट्सएप और सरकार आमने-सामने हैं। फेसबुक और गूगल नई गाइडलाइन को लेकर राजी हैं लेकिन ट्विटर और व्हाट्सएप आनाकानी कर रहे हैं। व्हाट्सएप ने सरकार के नए आईटी नियमों पर कहा है कि यह असंवैधानिक है और लोगों की निजता के मौलिक अधिकार के खिलाफ है। नई गाइडलाइन के बाद व्हाट्सएप और सरकार के बीच चल रहे विवाद के संबंध में हमने साइबर लॉ एक्सपर्ट उम्मेद मील से बात की है। आइए सवाल-जवाब के रूप में इसे समझने की कोशिश करते हैं।
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सवाल- सरकार कई नई गाइडलाइन के मुख्य बिंदू कौन-कौन से हैं?
  • जवाब- सरकार की पहली मांग यह है कि कंपनी भारत में एक ऐसे नोडल ऑफिसर को नियुक्त करे जिसके पास किसी मामले को लेकर शिकायत की जा सके। दूसरी मांग यह है कि 24 घंटे के अंदर शिकायत दर्ज करके उस पर आगे की कार्रवाई की जाए और तीसरी मांग यह है कि शिकायत होने के 15 दिन के अंदर उसका समाधान किया जाए। 
सवाल- क्या सरकार आपके मैसेज पढ़ेगी?
  • जवाब- नहीं, सरकार की नई गाइडलाइन में ऐसी कोई बात नहीं है और ना ही सरकार ने सोशल मीडिया कंपनियों से ऐसी कोई मांग रखी है।
सवाल- कंटेंट को लेकर नियम क्या हैं?
  • जवाब- आईटी एक्ट के अनुसार कंटेंट को लेकर भारत में कोई खास नियम फिलहाल नहीं है, लेकिन नई गाइडलाइन में कंटेंट फिल्टर करने की बात जरूर कही गई है। जैसे- 18+ वाले कंटेंट किसके पास पहुंचने चाहिए, इसे कंपनी को फिल्टर करना होगा।
सवाल- नए नियम से व्हाट्सएप को क्या परेशानी है?
  • जवाब- व्हाट्सएप पिछले कई सालों से भारत में अपने बिजनेस के विस्तार की तैयारी कर रहा है। भारत में व्हाट्सएप के करीब 55 करोड़ यूजर्स हैं जिनसे वह कोई शुल्क नहीं लेता है। अपने बिजनेस में मुनाफे के लिए उसने व्हाट्सएप बिजनेस को पेश किया है जिसे पेड करने की भी बात हो रही है लेकिन नई गाइडलाइन से व्हाट्सएप के बिजनेस को नुकसान पहुंच सकता है। ऐसे में वह यूजर्स की प्राइवेसी का हवाला देकर नई गाइडलाइन को लागू करने से कतरा रहा है। व्हाट्सएप को डर है कि उसके यूजर्स किसी अन्य प्लेटफॉर्म पर चले जाएंगे जिससे उसका बड़ा नुकसान हो जाएगा। सरकार की पॉलिसी साइबर क्राइम को खत्म करने के लिए है लेकिन व्हाट्सएप को अपने बिजनेस के खत्म होने का डर सता रहा है।
सवाल- क्या एक बार एन्क्रिप्शन टूटने के बाद सभी मैसेज पर नजर रखी जाएगी?
  • जवाब-  कुछ हद तक यह सही है, क्योंकि एक बार एन्क्रिप्शन खत्म होने के बाद यदि एन्क्रिप्शन किसी को मिल जाता है तो वह आपके मैसेज को पढ़ सकता है, लेकिन सरकार ने साफतौर पर कहा है कि उसे किसी के मैसेज या चैट से कोई मतलब नहीं है। सरकार सिर्फ इतनी जानकारी चाहती है कि सबसे पहले आपत्तिजनक या राष्ट्रविरोधी कंटेंट को किसने शेयर किया और यह जानकारी देने में व्हाट्सएप का एन्क्रिप्शन खत्म होने का कोई सवाल ही नहीं उठता है। व्हाट्सएप यूजर्स की प्राइवेसी की आड़ में अपना बिजनेस एजेंडी थोप रहा है और इसके लिए उसने दिल्ली हाई कोर्ट तक का दरवाजा खटखटाया है।

 

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