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Tokyo Olympic: जब रानी रामपाल नहीं खरीद सकी थीं हॉकी किट और जूते, तब 'द्रोणाचार्य' बन कर इस शख्स ने की थी मदद

Jitendra Bhardwaj जितेंद्र भारद्वाज
Updated Mon, 02 Aug 2021 02:24 PM IST

सार

रानी रामपाल ने कहा था, कोच बलदेव सिंह ने मेरा बहुत सहयोग किया है। उस दौर में मुझे समाज के साथ भी जूझना पड़ रहा था। हॉकी खिलाड़ी की ड्रेस को लेकर तरह तरह की बातें सुनने को मिलती थीं। कोच ने कहा, चिंता मत करो, अब तुम्हें केवल आगे जाना है, वही सोचो। देश के लिए खेलना है...
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रानी रामपाल
रानी रामपाल - फोटो : Agency (File Photo)
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विस्तार

टोक्यो ओलंपिक में भारतीय महिला हॉकी टीम ने सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया है। भारतीय महिला हॉकी टीम, ऑस्ट्रेलिया को हरा कर पदक जीतने के करीब पहुंच गई है। टीम की कप्तान रानी रामपाल को भरोसा है कि सेमीफाइनल में उनकी टीम अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन करेगी। शाहबाद, 'हरियाणा' के गरीब परिवार में जन्मी रानी के पास उस वक्त हॉकी किट और जूते खरीदने के पैसे भी नहीं थे, जब उनके पिता तांगा चलाते थे। रानी की प्रतिभा देखकर कोच सरदार बलदेव सिंह उसके लिए द्रोणाचार्य बन गए। उन्होंने रानी को अपनी 'शाहबाद हॉकी अकादमी' में न केवल हॉकी खेलना सिखाया, बल्कि उसे हॉकी किट और जूते भी मुहैया कराए। चंडीगढ़ में ट्रेनिंग के दौरान कोच बलदेव सिंह ने अपने घर पर ही उसके ठहरने का इंतजाम किया था। खास बात है कि उस दौरान बलदेव सिंह की पत्नी ने 'रानी' की डाइट की जिम्मेदारी उठाई थी। उसके बाद रानी रामपाल ने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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