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फीफा विश्व कप 2018: शूटआउट में हीरो बन गए क्रोएशिया के गोलकीपर सुबासिक

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Tue, 03 Jul 2018 05:51 AM IST
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गोलकीपर की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण होती है। चंद सेकंड वो जीरो से हीरो और हीरो से जीरो हो जाता है। विश्व कप के नॉकआउट दौर में गोलकीपर की अहमियत और भी बढ़ गई है। रविवार को रूस और क्रोएशिया दोनों टीमों को गोलकीपरों ने ही पेनाल्टी शूटआउट में क्वार्टर फाइनल का टिकट दिलाया, जहां रूस के इगोर अकीनफीव हीरो बने तो वहीं क्रोएशिया के सुबासिक ने डेनमार्क के खिलाफ तीन पेनाल्टी बचाई। मेजबान रूस ने 2010 की चैंपियन और इस बार दावेदारों में शामिल स्पेन को शूटआउट में 4-3 से और क्रोएशिया ने पेनाल्टी शूटआउट में 3-2 से बाजी मारी। 



गोल्डन ग्लव्स का मिलता है अवॉर्ड 

विश्व कप में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले गोलकीपर को यह पुरस्कार मिलता है। इस अवॉर्ड का नाम बदलता रहता है। पहले ये पूर्व सोवियत संघ गोलकीपर याशिन के नाम पर दिया जाता था। ब्राजील में हुए पिछले विश्व कप में जर्मनी के मैनुएल नेयुर को यह पुरस्कार मिला। 

 
सबसे उम्रदराज गोलकीपर 

मिस्र के अल हैदरी रूस में चल रहे विश्व कप में 45 साल 161 दिन की उम्र में उतरे। वह न केवल विश्व कप इतिहास में सबसे उम्रदराज गोलकीपर बने बल्कि सबसे उम्रदराज खिलाड़ी बनने का भी रिकॉर्ड अपने नाम किया। 

ये हैं चंद नामचीन गोलकीपर 

लेव याशिन -1954-1967

पूर्व सोवियत संघ के गोलकीपर को ब्लैक पैंथर्स और ब्लैक स्पाइडर के नाम से भी जाना जाता रहा है। 1958 से 1970 तक चार विश्व कप खेले। कॅरियर ओवरऑल 150 से ज्यादा पेनाल्टी बचाईं। 270 मैचों में एक गोल नहीं खाया। वह ऐसे एकमात्र गोलकीपर हैं जिन्हें फीफा का श्रेष्ठ फुटबॉलर का बैलन डि ओर पुरस्कार भी मिला है। 

गार्डन बैंक्स : 1963-1972

इंग्लैंड के पूर्व गोलकीपर ने पचास और साठ के दशक में देश के लिए 73 मैच खेले। उन्हें छह बार फीफा का श्रेष्ठ गोलकीपर घोषित किया गया। 1966 में इंग्लैंड को विश्व कप दिलाने में गार्डन का बड़ा योगदान था। 1970 के विश्व कप में उनका पेले के हेडर पर गोल बचाना शानदार बचाव के रूप में याद किया जाता है। उस विश्व कप में वह क्वार्टर फाइनल में बीमारी के चलते क्वार्टर फाइनल में नहीं उतरे थे और टीम को पश्चिम जर्मनी के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा था।

सेप मेइर : 1966-1979

जर्मनी के महान गोलकीपरों की इनकी गिनती होती है। गोलपोस्ट के नीचे अपनी फुर्ती के कारण द कैट के नाम से मशहूर थे। 1966 से पश्चिम जर्मनी के लिए लगातार चार विश्व कप खेले। 1974 में पश्चिम जर्मनी ने अपनी मेजबानी में विश्व कप जीता। सेप की भूमिका अहम रही। बेयरन म्यूनिख के लिए 500 से ज्यादा मैच खेले। 

डीनो जोफ : 1968-1983

इटली के इस दिग्गज गोलकीपर के नाम अनूठा रिकॉर्ड है। वह विश्व कप जीतने वाले सबसे उम्रदराज गोलकीपर रहे। 1982 में जब स्पेन में हुए विश्व कप में इटली ने खिताब जीता था तब वह उसके कप्तान थे। उनकी उम्र तक 40 साल चार महीने और 13 दिन थी। उन्हें टूर्नामेंट का श्रेष्ठ गोलकीपर चुना गया था। वह इटली के पहले गोलकीपर थे जिन्होंने विश्व कप के साथ यूरोपियन चैंपियनशिप भी जीती। उनके नाम अंतरराष्ट्रीय मैचों में 1142 मिनट तक गोल न खाने का रिकॉर्ड है। 

गिल्मर डोस सांतोस: 1953-1969

ब्राजील के गोलकीपर तीन विश्व कप 1958 से 1966 में खेले। बीसवीं सदी के श्रेष्ठ गोलकीपरों में उनकी गिनती होती थी। दिग्गज पेले की सांतोस टीम का हिस्सा भी रहे हैं। उन्हें पेले का गोलकीपर कहा जाता था। 1998 में उन्हें आर्डर ऑफ मेरिट दिया गया। देश के लिए 104 मैच खेले। 1958 और 1962 में विश्व विजेता बनी ब्राजील टीम में शामिल थे। वह लगातार दो विश्व कप जीतने वाले एकमात्र गोलकीपर रहे। 

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