लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Hindi News ›   Sports ›   Football ›   Comparing the French Champions of 98 to the winners of 2018

1998 विश्व कप विजेता फ्रांस से कितनी अलग है क्रोएशिया को हराने वाली मौजूदा चैंपियन टीम

स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 16 Jul 2018 12:35 PM IST
Comparing the French Champions of 98 to the winners of 2018
विज्ञापन
ख़बर सुनें

20 साल के इंतजार के बाद फ्रांस फुटबॉल विश्व कप खिताब जीतने में कामयाब हो पाया। युवा खिलाड़ियों से सजी इस टीम ने उलटफेर करने में माहिर क्रोएशिया को 4-2 से रौंदकर दूसरी बार विश्व कप खिताब पर कब्जा जमाया।



इसके पहले 1998 में ब्राजील को हराते हुए फ्रांस पहली बार चैंपियन बना था। ऐसे में आइए एक पड़ताल करते हैं और जानने की कोशिश करते हैं कि 2018 में चैंपियन बनी फ्रांस की टीम 1998 विश्व कप विजेता फ्रांस से कितनी अलग है?

उम्र

मौजूदा टीम युवाओं और अनुभवी खिलाड़ियों का जबरदस्त कॉकटेल है। 19 वर्षीय मबापे जहां इस टीम के ऊर्जा स्त्रोत हैं तो 33 वर्षीय गोलकीपर स्टीव मनडंडा सबसे वृद्ध खिलाड़ी। इस टीम की औसतन उम्र 26.3 साल है। 

दूसरी ओर 1998 बिग्रेड की औसतन उम्र 26.7 थी। 35 वर्षीय विकेटकीपर लामा इसके सबसे उम्रदराज खिलाड़ी थे। दोनों ही टीम में 5 खिलाड़ी हैं जो 30 या उसके करीब हैं, ऐसे में उम्र के पैमाने पर दोनों ही विश्वविजेता टीम समान स्तर पर है।

अनुभव और युवाओं का मिश्रण

1998 विश्व कप विजेता टीम में कुछ ऐसे बेहतरीन खिलाड़ी थे जो राष्ट्रीय टीम में खेलने को बेकरार थे। रॉबर्ट पियर्स, डेविड ट्रेजुगए, थियरे हेनरी और पैट्रिक विएरा जैसे रत्न थे, युवा खिलाड़ियों की इतनी जबरदस्त बेंच स्ट्रेंथ होने से मैनेजर के पास प्रयोग करने के तमाम विकल्प थे। ब्लैंक और कप्तान डेसचैम्प्स ने मिलकर उस टीम में युवाओं-अनुभवी खिलाड़ियों का बेहतरीन तालमेल बनाया था।

2018 विश्व कप विजेता टीम में भी यही समानता देखने को मिलती है। मौजूदा टीम में भी युवा खिलाड़ियों की कोई नहीं। डेंबेल, थॉमस लेमर, टॉलिसो और फेकीर कुछ बेहतरीन खिलाड़ियों के उदाहरण हैं, जो खेलने के लिए तैयार थे, लेकिन कम ही मौके मिले।

मिडफिल्ड

1998 और 2018 विश्व कप विजेता टीम की मुख्य ताकत उसकी मिडफिल्ड ही है। दोनों ही बार फ्रांस के पास ऐसे खिलाड़ी थे जो अटैक के साथ-साथ डिफेंस में भी अहम भूमिका निभा सकते हैं। मौजूदा टीम में मटूडी टीम के लिए बॉल बनाते हैं, पॉल पोग्बा और कांटे अपने कातिलाना पासिंग से विपक्षी टीम पर दबाव बनाते हैं। 

पहली बार विश्व कप जीतने वाली फ्रांस टीम में यही किरदार डिडिएर डेसचैम्प्स, इमैनुल पेतित, और जिदान निभाया करते थे। पेतित की ऊर्जा और संयोजन का कोई सानी नहीं था। विपक्ष में वह अभेद किला ही साबित होते। डेसचैम्प्स के सटिक पास जिदान को परफेक्ट अटैकिगं मिडफिल्डर बनाता था।

अटैक

फीफा विश्व कप इतिहास में फ्रांस अबतक 3 बार फाइनल में एंट्री कर चुका है। 1998, 2006 और 2018। हर बार इस टीम के स्टाइक गोलपोस्ट के पास जाकर मिसफायर करने के लिए कुख्यात हैं।

1998 में स्टीफन और क्रिस्टोफ स्टाइकर की भूमिका में थे। जबरदस्त क्षमता होने के बावजूद दोनों पूरे टूर्नामेंट में एक भी गोल करने में कामयाब नहीं हो सके। चौंकाते हुए युवा थिएरे हेनरी ने टीम के लिए स्कोर किए। 

2018 में भी वही कहानी दोहराई गई। गिराड की क्षमता पर किसी को कोई संदेह नहीं। मगर जरूरी मौकों पर वह गोल नहीं कर पाते। यहां तक कि उनके नाम गोल से ज्यादा असिस्ट मिलेंगे। 20 साल बाद हेनरी की जगह युवा मबापे ने ले ली। अपनी फूर्ती और तेजी से दुश्मन के डिफेंस को भेदते हुए उन्होंने पूरे टूर्नामेंट में 4 गोल किए और फ्रांस को कप दिलाने में अहम भूमिका निभाई।

जिदान का किरदार 2018 टीम में एंटोनी ग्रीजमैन संभाले हुए थे। बाएं पैर के फॉरवर्ड खिलाड़ी ने गिराड के लिए कई मौके बनाए। ठीक वैसे ही जैसे उस टीम में जिदान किया करते थे।
विज्ञापन

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all Sports news in Hindi related to live update of Sports News, live scores and more cricket news etc. Stay updated with us for all breaking news from Sports and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00