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हमें बैडमिंटन में नहीं, हर खेल में गोपीचंद चाहिए...

नवीन चौहान/ अमर उजाला, दिल्ली Updated Mon, 22 Aug 2016 10:44 PM IST
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पीवी सिंधू
पीवी सिंधू - फोटो : PTI
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आम तौर पर कहा जाता है कि एक असफल खिलाड़ी अच्छा कोच साबित होता है। लेकिन यह कहावत भारतीय बैडमिंटन के द्रोणाचार्य पुलेला गोपीचंद पर खरी नहीं उतरती है। साल 2001 में ऑल इंग्लैंड बैडमिंटन चैंपियनशिप जीतने वाले पुलेला गोपीचंद एक सफल बैडमिंटन खिलाड़ी रहे हैं लेकिन बतौर कोच वह ज्यादा सफल हो रहे हैं। लगातार दो ओलंपिक खेलों में देश के लिए पदक जीतने वाले खिलाड़ियों में एक चीज कॉमन है कि दोनों के कोच पुलेला गोपीचंद ही थे।
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गोपीचंद ने पिछले एक दशक में भारतीय बैडमिंटन का कायाकल्प कर दिया है। लंदन ओलंपिक में 5 खिलाड़ियों ने ओलंपिक के लिए क्वालीफाई किया था जिनकी संख्या रियो में बढ़कर 7 हो गई। लंदन में भी भारतीय खिलाड़ियों ने बेहतरीन प्रदर्शन किया वहां साइना ने कांस्य जीता। रियो में पदक चांदी का हो गया और देश को सिंधू के रुप में एक नया सितारा मिल गया। 


पुरुषों में लंदन में पी कश्यप क्वार्टर फाइनल में पंहुचे थे, वहीं इस बार विश्व के नंबर 9 खिलाड़ी के श्रीकांत क्वार्टर फाइनल तक पहुंचे। वह विश्व नंबर एक खिलाड़ी लिन डेन से हार गए लेकिन उन्होंने एक सेट जीतकर यह साबित कर दिया कि चीन की दीवार अब भारतीयों के लिए बाधा नहीं रह गई है। यही बात सिंधू ने भी विश्व की नंबर दो खिलाड़ी को हराकर साबित की।  

 
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