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अयंगर योगः तनाव को दूर करता है शवासन

रजवी एच मेहता Updated Sun, 15 Jul 2018 08:03 AM IST
 Iyengar Yoga: Savasana
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अक्सर आपने देखा होगा कि किसी कंपनी या संगठनों में काम करने वाले लोग अपने सहयोगियों को उनकी कार्यक्षमता बढ़ाने व उनमें उत्साह पैदा करने के लिए साहस भरी बातें बताते हैं। जैसे कि 'आप ये कर सकते हो। आप जो चाहते हो उसे हासिल कर सकते हो। आपको अपने जीवन के लक्ष्यों के लिए योजना बनानी चाहिए।' यह बातें किसी को भी अच्छी लगेगी लेकिन इसके बावजूद कई बार आपको जीवन में वो हासिल नहीं हो पाता जिसकी इच्छा आपको रहती है। 
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दरअसल, जीवन भी कुछ इसी प्रकार है। जो योजनाएं हम अपने जिंदगी संवारने के लिए तैयार करते हैं कई बार वहीं हमारे लिए विपरीत साबित हो जाती हैं। फिर हम ये कहने लगते हैं कि शायद यही हमारे भाग्य को मंजूर होगा। यही वजह कि जितना हम अपने बच्चों के जीवन को व्यवस्थित करने के लिए उन्हें सिखाते हैं, वैसे ही हमें खुद भी सीखने की जरूरत होती है।

ऐसे में हमे सीखने की जरूरत होती है कि जीवन में सभी चीजें प्लानिंग के मुताबिक ही नहीं चलती। कभी-कभी परिस्थिति उससे अलग भी होती है। दरअसल, हम पहले पहलू पर ही सबसे ज्यादा जोर डालते हैं जबकि दूसरा पहलू तो हमसे छूट ही जाता है। शायद यही वजह है कि जब इंसान पदोन्नती के लिए कड़ी मेहनत और प्लानिंग करता है इसके बावजूद भी अगर उसे निराशा हाथ लगती है तो संभवत: वह हताश और निराश हो जाता है। धीरे-धीरे हमारी असफलता दुख में तब्दील होने लगती है और फिर यह कारण बनती है ईर्ष्या और क्रोध का।

ऐसे में हमारा मन सोचने लगता है कि जिस व्यक्ति को मेरी जगह पदोन्नती मिली है वह मुझ जितना काबिल तो नहीं है। न ही उसने कभी मेरे जितनी मेहनत की है। फिर भी आज कामयाबी उसके कदम चूम रही है। ये सवाल हम खुद से पूछने लगते हैं लेकिन इनका उत्तर हमें कभी मिल ही नहीं पाता। 

यही स्थिति हमारे दिमाग पर एक उदासी का पर्दा डाल दाती है जिसे हटा पाना खुद के लिए काफी मुश्किल हो जाता है। कुछ समय बीतने के बाद फिर हम खुद को उसी स्थिति में पाते हैं। हम उसी उम्मीद की रथ पर सवार होते हैं जिस पर कि पहले थे, जिनमें से कुछ उम्मीदें पूरी हो पाती हैं तो कुछ बाकी रह जाती हैं। लेकिन उम्मीद के रथ का पहियां यूं ही चलती रहती है।   
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