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ये है रुद्राक्ष पहनने के नियम और फायदे, इनमें छिपी होती हैं कई चमत्कारी शक्तियां

धीरज साहू Updated Sat, 03 Mar 2018 07:37 AM IST
benefits of wearing rudraksha and hidden inside many miraculous powers
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रुद्राक्ष मनुष्य के लिए भगवान शिव द्वारा प्रदान किया हुआ एक अनुपम उपहार है। पौराणिक कथानुसार, जब भगवान शिव ने त्रिपुर नामक असुर के वध के लिए महाघोर रूपी अघोर अस्त्र का चिंतन किया, तब उनके नेत्रों से आंसुओं की कुछ बूंदे धरती पर गिरीं, जिनसे रुद्राक्ष के वृक्ष की उत्पत्ति हुई। इसी वजह से रुद्राक्ष भगवान शिव का प्रतिनिधि माना जाता है ।
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वैसे तो रुद्राक्ष किसी भी वर्ण जाति का व्यक्ति धारण कर सकता है, लेकिन शास्त्रों में वर्ण के अनुसार, रुद्राक्ष का वर्गीकरण किया गया है। ब्राह्मणों को श्वेत यानि बादामी रंग का, क्षत्रियों को लाल रंग का, वैश्यों को पीले रंग का तथा शूद्रों को काले रंग का रुद्राक्ष धारण करना श्रेयस्कर होता है। धारण करने लिए रुद्राक्ष हमेशा सुंदर, सुडौल, चिकना, कांटेदार और प्राकृतिक छिद्र से युक्त होना चाहिए। जो रुद्राक्ष कहीं से टूटा-फूटा और कृत्रिम छिद्र से युक्त हो, ऐसा रुद्राक्ष धारण करने योग्य नहीं माना गया है।

वैसे तो रुद्राक्ष मुख्यतः एक मुखी से लेकर चौदह मुखी तक पाया जाता है, लेकिन कहीं-कहीं बाइस मुखी रुद्राक्ष भी पाए जाते हैं, जिनको धारण करने का अलग-अलग फल प्राप्त होता है। आकार के अनुसार देखा जाए, तो धारण करने हेतु चने के आकार का रुद्राक्ष अधम, बेर के आकार का माध्यम तथा आंवला के आकार का उत्तम माना गया है। रुद्राक्ष धारण करने के लिए सोमवार का दिन शुभ माना गया है। 
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