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कुंभ मेला 2019: अघोरी क्या वाकई बेहद डरावने होते हैं? जानें इनके बारे में सबकुछ

स्वामीनाथन नटराजन, बीबीसी वर्ल्ड सर्विस Updated Sat, 19 Jan 2019 01:26 PM IST
aghori
aghori - फोटो : Social media
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गंगा नदी में डुबकी लगाने के लिए देश-विदेश से संगम किनारे पहुंचे तमाम संप्रदायों के हजारों साधु इकट्ठा हुए हैं। इन्हीं साधुओं में एक वर्ग ऐसा भी है जिसे लेकर आम जनमानस के बीच भय की स्थिति बनी रहती है। साधुओं के इस वर्ग को 'अघोरी समुदाय' कहते हैं। ऐसी अवधारणा है कि अघोरी श्मशान घाट में रहते हैं, जलती लाशों के बीच खाना खाते हैं और वहीं सोते हैं। इस तरह की बातें भी प्रचलित हैं कि अघोरी नग्न घूमते हैं, इंसानी मांस खाते हैं, खोपड़ी में खाना खाते हैं और दिन-रात गांजा पीते रहते हैं।
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कौन होते हैं अघोरी ?

लंदन में 'स्कूल ऑफ अफ्रीकन एंड ओरिएंटल स्टडीज़' में संस्कृत पढ़ाने वाले जेम्स मैलिंसन बताते हैं, "अघोर दर्शन का सिद्धांत यह है कि आध्यात्मिक ज्ञान हासिल करना है और ईश्वर से मिलना है तो शुद्धता के नियमों से परे जाना पड़ेगा।" ऑक्सफ़र्ड में पढ़ाई करने वाले मैलिंसन एक महंत और गुरु भी हैं लेकिन उनके समुदाय में अघोरी समुदाय की प्रक्रियाएं वर्जित हैं।

कई अघोरी साधुओं के साथ बातचीत के आधार पर मैलिंसन कहते हैं, "अघोरियों का तरीका ये है कि स्वाभाविक वर्जनाओं का सामना करके उन्हें तोड़ दिया जाए। वे अच्छाई और बुराई के सामान्य नियमों को ख़ारिज करते हैं। आध्यात्मिक प्रगति का उनका रास्ता अजीबोगरीब प्रक्रियाओं, जैसे कि इंसानी मांस और अपना मल खाने जैसी चीज़ों से होकर गुज़रता है। लेकिन वो ये मानते हैं कि दूसरों द्वारा त्यागी गई इन चीज़ों का सेवन करके वे परम चेतना को प्राप्त करते हैं।"
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अघोरियों का इतिहास

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