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जानिए कैसे चुना जाता है कांची मठ का शंकराचार्य, क्या होती है पूरी प्रकिया

धर्म डेस्क, अमर उजाला Updated Mon, 05 Mar 2018 11:08 AM IST
know how to select shankaracharya of kanch math
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कांची शंकर मठ के प्रमुख श्री श्री जयेंद्र सरस्वती के निधन के बाद विजयेंद्र सरस्वती को मठ का नया पीठाधीश बनाया गया है। कांची शंकर मठ का अपना एक इतिहास रहा है। आदि शंकर को मठ के पहले गुरू के रूप में जाना जाता है।मठ की वेबसाइट के अनुसार उनका जन्म 2500 साल पहले 509 ईसा पूर्व में हुआ था। उन्होंने अपने अंतिम दिन कांची में बिताए और वहीं उन्होंने 'मुक्ति' प्राप्त की।
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ये भी कहा जाता है कि मठ की स्थापना 482 ईसा पूर्व में हुई थी। आदि शंकर के बाद भी कांचीपुरम से ही मठ का कार्य उसके 62वें प्रमुख तक लगातार चलता रहा। लेकिन बाद में कांचीपुरम में राजनीतिक हालात बदलने के बाद शंकर मठ के 62वें प्रमुख(1764-1783) को तमिलनाडु के अलग-अलग स्थानों में जाना पड़ा।

तंजावूर की स्थापना से एक साल पहले वहां कुंभकोणम में एक नए मठ की स्थापना की गई। यहीं पर 62वें, 63वें और 64वें मठ प्रमुख ने मुक्ति प्राप्त की। साल 1907 में श्री चंद्रशेखर को शंकर मठ का प्रमुख नियुक्त किया गया। उसके बाद 1954 में उन्होंने जयेंद्र सरस्वती को अपना उत्तराधिकारी चुना। बाद में 1983 में जयेंद्र सरस्वती ने विजयेंद्र सरस्वती को अपने उत्ताधिकारी के रूप में चुना। विजयेंद्र सरस्वती तमिलनाडु के कांचीपुरम ज़िले के थंडालम गांव से आते हैं।






 
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