विज्ञापन

धर्म: बिना अवतार लिए ही हर साल इस देवता की क्यों मनाई जाती है जयंती

धर्म डेस्क,अमर उजाला Updated Thu, 16 Aug 2018 09:49 AM IST
kalki jayanti on 16 august 2018 the truth about kalki
विज्ञापन
ख़बर सुनें
हिन्दू धर्म में हर दिन कोई न कोई व्रत-त्योहार जरूर मनाया जाता है। इन व्रत-त्योहारों के अलावा भगवान के अवतार दिन पर उनका खास दिन होता है। जिसे भारत में बड़े ही उत्साह और उमंग के साथ मनाया जाता है। हिन्दू शास्त्रों के अनुसार भगवान विष्णु के त्रेता, सतयुग और द्वापर युग में अब तक नौ अवतार हो चुके हैं और दसवें अवतार का इंतजार चल रहा है। पुराणों के अनुसार जब कलयुग अपने चरम पर होगा तब भगवान अपने दसवें अवतार में भगवान कल्कि रूप में इस पृथ्वी पर अवतरित होंगे। पुराणों में बताया गया है कि भगवान कल्कि सावन मास के शुक्ल पक्ष की पंचमी तिथि को जन्म लेंगे और कलयुग का अंत कर एक नई रचना गढ़ी जाएगी। इसी को आधार बनाकर हर साल सावन माह में शुक्ल पक्ष को कल्कि जयंती के रूप में मनाया जाता है। इस साल 2018 में कल्कि जयंती मनाई जाएगी। 
विज्ञापन
इस स्थान पर होगा जन्म
शास्त्रों के अनुसार कलयुग के अंतिम दौर में भगवान विष्णु अपने दसवें अवतार के रूप में कल्कि भगवान का अवतार लेंगे। उनका यह अवतार कलियुग और सतयुग के संधि काल में होगा जो 64 कलाओं से युक्त होगा। पुराणों के अनुसार भगवान कल्कि उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद जिले के संभल नामक स्थान पर विष्णुयशा नाम के एक ब्राह्राण परिवार में होगा। भगवान कल्कि सफेद घोड़े पर सवार होकर पापियों का नाश करके फिर से धर्म की रक्षा करेंगे।

इस घटना का जिक्र श्रीमद्गागवत महापुराण के 12वें स्कंद के 24वें श्लोक में कहा गया है जिसके अनुसार गुरु,सूर्य और चन्द्रमा जब एक साथ पुष्य नक्षत्र में प्रवेश करेंगे तो भगवान कल्कि का जन्म होगा।
सम्भलग्राममुख्यस्य ब्राह्मणस्य महात्मनः।
भवने विष्णुयशसः कल्किः प्रादुर्भविष्यति।।
  

पौराणिक मान्यता के अनुसार भगवान कल्कि का अवतरण कलियुग के अन्तिम समय में होगा। इनके अवतार लेते ही सतयुग का आरम्भ होगा। भगवान कृष्ण के प्रस्थान से कलियुग की शुरूआत हुई थी। नन्द वंश के राज से कलियुग में वृद्धि हुई, वहीं भगवान कल्कि के अवतार से कलियुग का अन्त होगा। कलयुग की अवधि 4,32,000 वर्ष बताई गई है। वर्तमान में कलियुग के 5,119 साल पूरे हो चुके है।

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें  

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all spirituality news in Hindi related to religion, festivals, yoga, wellness etc. Stay updated with us for all breaking news from fashion and more Hindi News.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Religion

पितृपक्ष 2018: आखिर गया में ही पिंडदान क्यों?

वैसे तो पिंडदान करने के लिए देश में कई स्थानों पर किया जाता है लेकिन सबसे ज्यादा महत्व बिहार के गया में पिंडदान का है।

19 सितंबर 2018

विज्ञापन

Related Videos

19 सितंबर NEWS UPDATES : एशिया कप में भारत-पाकिस्तान के बीच महामुकाबला समेत देखिए सारी खबरें

एशिया कप में टीम इंडिया के धुरंधर पाकिस्तान के खिलाफ विस्फोट करने को तैयार, तीन तलाक पर अध्यादेश को कैबिनेट की बैठक में मिली मंजूरी समेत देखिए देश-दुनिया की सारी खबरें अमर उजाला टीवी पर।  

19 सितंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree