लोकप्रिय और ट्रेंडिंग टॉपिक्स

Hindi News ›   Spirituality ›   Religion ›   It has to be born again after death

जैसा भाव, वैसा अंत

साध्वी ऋतुपर्णा Updated Fri, 13 Jul 2018 03:44 PM IST
karm
karm
विज्ञापन
ख़बर सुनें
मरने के बाद फिर से जन्म लेना पड़ता है। इस बात में सभी धर्म भले ही यकीन नहीं करते हैं, लेकिन जीवन का अस्तित्व मरने के बाद भी रहता है, इस मान्यता को लेकर कोई विवाद नहीं है। अर्जेंटीना की यूनिवर्सिटी ऑफ ब्यूनस आयरस के शोधार्थियों ने मृत्यु के करीब पहुंचे सत्तर व्यक्तियों के अनुभवों, तकलीफों और पिछले जीवन का अध्ययन किया। इसमें पाया कि अंतकाल में उन्हें वही बातें याद आ रही थी, जिन्हें वे कार्यकारी जीवन के दौरान जेहन में बसाए हुए थे। न केवल बसाए हुए थे, बल्कि वैसे ही काम कर रहे थे।


कुछ व्यक्ति ऐसे भी थे, जो पिछले जीवन में जैसे भी रहे हों, आयु के संध्याकाल में अच्छे काम कर जिंदगी को संवराना चाहते थे। उन्होंने अपने जीवन की दिशाधारा तो बदल ली, लेकिन मृत्यु के समय पिछले कर्मों की यादों का दंश उन्हें परेशान करता रहा था। कहा जाता है कि अंतकाल में वही भाव चित्त में घनीभूत होता है, जो पूरे जीवन भर मन में छाया हुआ था और उसी के अनुसार आगे की यात्रा शुरू होती है।

आपकी राय हमारे लिए महत्वपूर्ण है। खबरों को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।

खबर में दी गई जानकारी और सूचना से आप संतुष्ट हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन
सबसे विश्वसनीय हिंदी न्यूज़ वेबसाइट अमर उजाला पर पढ़ें आस्था समाचार से जुड़ी ब्रेकिंग अपडेट। आस्था जगत की अन्य खबरें जैसे पॉज़िटिव लाइफ़ फैक्ट्स,स्वास्थ्य संबंधी सभी धर्म और त्योहार आदि से संबंधित ब्रेकिंग न्यूज़।
 
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें अमर उजाला हिंदी न्यूज़ APP अपने मोबाइल पर।
Amar Ujala Android Hindi News APP Amar Ujala iOS Hindi News APP
विज्ञापन
विज्ञापन
Election
  • Downloads
    News Stand

Follow Us

  • Facebook Page
  • Twitter Page
  • Youtube Page
  • Instagram Page
  • Telegram
एप में पढ़ें

प्रिय पाठक

कृपया अमर उजाला प्लस के अनुभव को बेहतर बनाने में हमारी मदद करें।
डेली पॉडकास्ट सुनने के लिए सब्सक्राइब करें

क्लिप सुनें

00:00
00:00