विज्ञापन
विज्ञापन

बकरीद 2018 : फर्ज-ए-कुर्बान का दिन, जिसके आध्यात्मिक मायने से आप अब तक हैं अनजान

प्रो. अख्तरुल वासे Updated Mon, 20 Aug 2018 11:30 PM IST
bakrid
bakrid
ख़बर सुनें
इस्लाम में दो तरह की ईद मनाई जाती है। पहली जो एक महीने तक चलने वाले रमजान के रोजे के बाद मनाई जाती है और दूसरी जो एक महीने के अंतराल के पश्चात हज के महीने में मनाई जाते हैं। पहली ईद को भारतीय संदर्भ में मीठी ईद और दूसरी को कुर्बानी की ईद कहते हैं। इसे ईद-उल-अजहा भी कहते हैं। बकरीद हजरत इब्राहीम नाम के ईश दूत और उनके बेटे हजरत इस्माइल की उस घटना की यादगार है, जिसमें इब्राहिम सपने में निरंतर ये देख रहे थे कि वह अपने बेटे को अल्लाह के नाम पर कुर्बान कर रहे हैं या फिर कहें कि उनकी बलि दे रहे हैं। 
विज्ञापन
विज्ञापन
अल्लाह ने लिया था इब्राहीम का इम्तिहान
हजरत इब्राहीम ने जब यह बात अपने बेटे को बताया तो वे अपनी जान देने के लिए तुरंत राजी हो गए और उन्होंने कहा कि यदि हमारे ईश्वर ऐसा चाहते हैं तो हमें इसमें कोई संकोच नहीं करना चाहिए। वहीं ईश्वर को उनकी जान नहीं चाहिए थी, बल्कि वह तो इब्राहीम की अपने प्रति निष्ठा और आस्था को परखना चाहते थे, जिसमें वह पूरे खरे उतरे। जब पिता इब्राहीम बेटे को कुर्बान करने को जा रहे थे तो रास्ते में शैतान ने उनको भटकाने की कोशिश की। शैतान ने पहले पिता इब्राहीम से कहा कि ये जवान बेटा है, तुम्हारे बुढ़ापे की लाठी है, इसको कुर्बान कर दोगे तो तुम्हारी देख-रेख कौन करेगा?

कायम रहा ईमान, न भटका सका शैतान
हजरत इब्राहीम ने जब शैतान को दुत्कार दिया तो उसने उनके बेटे हजरत इस्माइल को बरगलाना चाहा? लेकिन बेटे ने भी उसको दुत्कार दिया। जब बाप- बेटे को कुर्बान करने के लिए तैयार हुए तब बेटे ने बाप से कहा अपनी आंखों पर पट्टी बांध लीजिए। कहीं ऐसा न हो कि पुत्र प्रेम में आपके हाथ डगमगा जाए। और ऐसा ही हुआ और उन्होंने पट्टी बांध लिया। 

तब अल्लाह ने बचाई बेटे की जान
हजरत इब्राहीम ने जब बेटे को लिटाकर छूरी फेरना चाह तो उसी समय ईश्वर ने एक जानवर भेज दिया और उनके बेटे इस्माइल की जान बचा ली। उसी की याद आज सारी दुनिया में मुसलमान जो आर्थिक रूप से सक्षम और संपन्न हैं, वो कुर्बानी करते हैं और इब्राहीम और इस्माइल का अनुसरण करते हैं। हजरत इब्राहीम वो दिव्य दूत हैं जिन पर यहूदी, ईसाई और मुसलमान समान रूप से आस्था रखते हैं। 

निहित है समानता का संदेश 
कुरान मजीद में एक बात का खुद अल्लाह ने जिक्र किया है कि कुर्बानी के जानवर का खून हड्डी और गोश्त के साथ नहीं जाता है, बल्कि अल्लाह को तुम्हारे नेकी और शुद्ध आचरण पसंद है। यही कारण है कि कुर्बानी के बाद उसके तीन हिस्से किए जाते हैं। एक अपनों के लिए, दूसरा अपने संबंधियों और मित्रों के लिए और अंतिम तीसरा समाज के गरीब के लोगों के लिए रखा जाता है। सबसे अहम बात यह कि इसमें हिस्से करते वक्त किसी तरह का भेदभाव नहीं किया जाता है। सबको समान रूप से गोश्त दिया जाता है। 

स्वच्छता का रखें पूरा ख्याल
इस्लाम में सफाई-सुथराई को आधा ईमान कहा गया है। इसलिए कुर्बानी करते वक्त उसका ख्याल रखना चाहिए कि किसी तरह की गंदगी न फैलाई जाए जो स्वास्थ्य वातावरण के लिए हानिकारक हो। 

करें दूसरों की भावनाओं की कद्र
तीसरी बात ये है कि कुर्बानी ऊपर वाले को खुश करने के लिए है और ऊपर वाले की खुशी इसमें निहित है कि आप अपने किसी भाई-बंधु के साथ समाज में रहने वाले दूसरे धर्म के लोगों की भावनाओं को आहत न करें। इसलिए कुर्बानी को नुमाईश का जरिया नहीं बनाना चाहिए। 

पाक हज का महीना
यह महीना हज का भी है जिसमें संपन्नशील मुसलमान आदमी और औरत जीवन में एक बार मक्का और मदीना की यात्रा करते हैं। हज ईश्वर के प्रति समर्पण की भावना का प्रतीक तो है ही, साथ ही इब्राहीम जैसे पिता हाजरा जैसी मां और इस्माइल जैसे बेटे के उस आदर्श व्यवहार का अनुसरण है, जिसमें उन्होंने अपने पैदा करने वाले, इस सृष्टि को बनाने वाले अल्लाह के आज्ञाकारी बंदे होने का सबूत दिया। जिसने दो बिना सिले हुए कपड़े पहनकर सबको एक रंग में एक समान रंग दिया। साज-सज्जा एवं अहंकार की बलि देने का नाम हज है। समता और समानता को आम करना हज का मूल उद्देश्य है। 

- लेखक जाकिर हुसैन, इंस्टीट्यूट आफ इस्लामिक स्टडी, जामिया मिल्लिया इस्लामिया दिल्ली के पूर्व निदेशक और वर्तमान में जोधपुर, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय के अध्यक्ष हैं। 

Recommended

HP Board Class 10th & 12th 2019 की परीक्षाओं का सबसे तेज परिणाम देखने के लिए रजिस्टर करें।
HP Board 2019

HP Board Class 10th & 12th 2019 की परीक्षाओं का सबसे तेज परिणाम देखने के लिए रजिस्टर करें।

अक्षय तृतीया पर अपार धन-संपदा की प्राप्ति हेतु सामूहिक श्री लक्ष्मी कुबेर यज्ञ - 07 मई 2019
ज्योतिष समाधान

अक्षय तृतीया पर अपार धन-संपदा की प्राप्ति हेतु सामूहिक श्री लक्ष्मी कुबेर यज्ञ - 07 मई 2019

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all spirituality news in Hindi related to religion, festivals, yoga, wellness etc. Stay updated with us for all breaking news from fashion and more Hindi News.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

Most Read

Religion

हिंदू पंचांग: वैशाख महीना आरम्भ, जानिए इस माह का महत्व और व्रत-त्योहार

वैशाख मास की शुरुआत 20 अप्रैल से शुरू होकर 18 मई को वैशाख पूर्णिमा के साथ ही समाप्त होगा

20 अप्रैल 2019

विज्ञापन

Hanuman Jayanti 2019 : हनुमान जयंती पर घर बैठे करें देश के 10 बड़े हनुमान मंदिर के दर्शन

भारत की भूमि पर शायद ही ऐसा कोई कोना हो जहां पर बजरंगी का कोई पावन धाम न मौजूद हो। हनुमत जयंती के पावन पर्व पर आइए आपको कराते हैं देश के 10 बड़े चमत्कारी हनुमान मंदिर के दर्शन

19 अप्रैल 2019

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree
Election