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Vat Purnima Vrat 2021: वट पूर्णिमा व्रत आज, जानें मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 24 Jun 2021 05:41 AM IST

सार

माना जाता है कि वट वृक्ष की पूजा करने वाली महिलाओं का सुहाग अजर-अमर रहता है धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी दिन सावित्री अपने पति के प्राण यमराज से वापस ले आई थीं। यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं।
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वट पूर्णिमा व्रत 2021
वट पूर्णिमा व्रत 2021 - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार

हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व होता है। सभी पूर्णिमा में ज्येष्ठ माह की पूर्णिमा को खास माना गया है। इस दिन गंगा स्नान से पापों से मुक्ति मिल जाती है। आज के दिन वट पूर्णिमा व्रत भी रखा जाता है। इस साल 24 जून को वट पूर्णिमा व्रत रखा जाएगा। सुहागिन महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुखी जीवन के लिए रखती हैं। इसमें दान और गंगा स्नान का अधिक महत्व माना गया है। 
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ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - जून 24, 2021 तड़के 03:32 बजे 
पूर्णिमा तिथि समाप्त - जून 25, 2021 को रात 12:09 बजे 

वट पूर्णिमा व्रत की विधि
एक और बांस की टोकरी लें और उसमें धूप, दीप कुमकुम, अक्षत, मोली आदि रखें। इसके बाद बांस के बने पंखे से सत्यवान और सावित्री को हवा करते हुए वट वृक्ष के एक पत्ते को अपने बालों में लगाकर रखा जाता है। अब प्रार्थना करते हुए लाल मौली या सूत के धागे को लेकर वट वृक्ष की परिक्रमा करते हैं और घूमकर वट वृक्ष को मौली या सूत के धागे से 7 बार बांधते हैं। यह प्रक्रिया पूरी करने के बाद कथा सुनते हैं और पंडित जी को दक्षिणा देते हैं। पूजा के बाद घर के बड़ों के पैर छूकर आर्शीवाद लें। इसके बाद मिठाई खाकर अपना व्रत खोलें।


वट वृक्ष का महत्व
हिन्दू धर्म में वट के वृक्ष को बहुत महत्व दिया जाता है। वट का मतलब होता है बरगद। माना जाता है कि वट वृक्ष की पूजा करने वाली महिलाओं का सुहाग अजर-अमर रहता है धर्मग्रंथों के अनुसार, इसी दिन सावित्री अपने पति के प्राण यमराज से वापस ले आई थीं। यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं। वट वृक्ष को ब्रह्मा, विष्णु और महेश का स्वरूप माना जाता है। यह इकलौता ऐसा वृक्ष है, जिसे तीनों देवों के रूप में पूजा जाता है। माना जाता है कि इस वृक्ष में ब्रह्मा, विष्णु और महेश का वास होता है। जिनके प्रसन्न होने पर व्यक्ति की सभी मनोकामनाएं पूरी होती हैं।

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