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Jyeshth Purnima 2021 Date: कब है ज्येष्ठ पूर्णिमा, जानें तिथि, पूजा विधि और महत्व

धर्म डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Sat, 12 Jun 2021 07:24 AM IST

सार

  • 24 जून को पड़ रही है ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि
  • इस दिन स्नान व्रत एवं दान-पुण्य करने का है महत्व
  • ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि पर रखा जाता है वट पूर्णिमा व्रत
  • इस दिन मनाई जाती है कबीर जयंती
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ज्येष्ठ पूर्णिमा 2021
ज्येष्ठ पूर्णिमा 2021 - फोटो : @pixabay

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विस्तार

Jyeshth Purnima 2021 Date: ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि 24 जून को पड़ रही है। इस तिथि को जेठ पूर्णिमा या जेठ पूर्णमासी कहा जाता है। हिन्दू धर्म में पूर्णिमा तिथि का विशेष महत्व माना जाता है। इस दिन पवित्र नदी अथवा जलकुंड में स्नान, व्रत एवं दान-पुण्य के काम करने की मान्यता है। माना जाता है कि इस दिन स्नान, व्रत एव दान-पुण्य के कार्य करने से जातकों को शुभ फल प्राप्त होते हैं। इस दिन वट पूर्णिमा व्रत रखा जाता है और कबीरदास जयंती भी मनाई जाती है। हिन्दू पंचांग के अनुसार, ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि गुरुवार के दिन पड़ रही है। सूर्य और चंद्रमा क्रमशः मिथुन और वृश्चिक राशि में स्थित होंगे। पूर्णिमांत के अनुसार, यह तिथि ज्येष्ठ माह की अंतिम तिथि होती है। इसके बाद आषाढ़ माह प्रारंभ हो जाता है। आइए जानते हैं ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का मुहूर्त, व्रत विधि और महत्व के बारे में...
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ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का मुहूर्त
पूर्णिमा तिथि प्रारम्भ - जून 24, 2021 तड़के 03:32 बजे 
पूर्णिमा तिथि समाप्त - जून 25, 2021 को रात 12:09 बजे 

पूर्णिमा व्रत विधि
पूर्णिमा के दिन सुबह स्नान से पहले व्रत का संकल्प लें। पवित्र नदी या कुंड में स्नान करें और स्नान से पूर्व वरुण देव को प्रणाम करें। स्नान के पश्चात सूर्य मंत्र का उच्चारण करते हुए सूर्य देव को अर्घ्य देना चाहिए। स्नान से निवृत्त होकर भगवान मधुसूदन की पूजा करनी चाहिए और उन्हें नैवेद्य अर्पित करना चाहिए। अंत में ब्राह्मणों को दान-दक्षिणा दें।

 
ज्येष्ठ पूर्णिमा तिथि का महत्व
ज्येष्ठ पूर्णिमा को वट पूर्णिमा व्रत रखा जाता है। यह व्रत महाराष्ट्र, गुजरात और दक्षिण के राज्यों में विशेष रूप से रखा जाता है, जबकि उत्तर भारत में यह व्रत वट सावित्री के रुप मे मनाया जाता हैं, जो ज्येष्ठ माह की कृष्ण पक्ष की अमावस्या को पड़ता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन सावित्री ने अपने पति के प्राण यमराज से वापस लेकर आईं थी। यही वजह है कि विवाहित महिलाएं अपने पति की लंबी आयु और सुख समृद्धि के लिए इस व्रत को रखती हैं। 

इस दिन मनाई जाती है कबीर जयंती
संत कबीर का जन्म ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन हुआ था। इसलिए प्रति वर्ष ज्येष्ठ पूर्णिमा के दिन उनकी जयंती मनाई जाती है। कबीरदास भक्तिकाल के प्रमुख कवि थे, वे ज्ञानाश्रयी-निर्गुण शाखा की काव्यधारा के प्रवर्तक थे। उन्होंने अपना संपूर्ण जीवन समाज की बुराइयों को दूर करने में लगा दिया। दोहे के रूप में उनकी रचनाएं आज भी गायी गुनगुनाई जाती हैं।

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