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Himachal High Court: वोल्वो चला रहे अप्रशिक्षित चालक, हिमाचल हाईकोर्ट ने लिया कड़ा संज्ञान

अमर उजाला ब्यूरो, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Sat, 06 Aug 2022 12:00 AM IST
सार

प्रदेश हाईकोर्ट ने परिवहन निगम की वोल्वो बसों को अप्रशिक्षित चालकों के हवाले करने पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने निगम से जवाबतलब किया है। 

Court Shimla
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विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने परिवहन निगम की वोल्वो बसों को अप्रशिक्षित चालकों के हवाले करने पर कड़ा संज्ञान लिया है। मुख्य न्यायाधीश एए सैयद और न्यायाधीश ज्योत्सना रिवाल दुआ की खंडपीठ ने निगम से जवाबतलब किया है। वोल्वो बस चालक हितेंद्र सिंह की ओर से दायर याचिका में आरोप लगाया गया है कि 30 जुलाई, 2022 को निगम ने चार अप्रशिक्षित बस चालकों को तारादेवी वोल्वो यूनिट में स्थानांतरित किया गया है। दलील दी गई है कि याचिकाकर्ता वर्ष 2010 से बतौर चालक सेवाएं दे रहा है। निगम ने वर्ष 2016 में याचिकाकर्ता से वोल्वो बस चलाने का प्रशिक्षण बंगलूरू से करवाया। प्रशिक्षण के बाद याचिकाकर्ता रोहड़ू यूनिट में वोल्वो बस चला रहा था। मार्च में याचिकाकर्ता को रोहड़ू यूनिट से तारादेवी वोल्वो यूनिट में स्थानांतरित किया गया।



आरोप लगाया है कि याचिकाकर्ता को तारादेवी वोल्वो यूनिट से हटाने के इरादे से निगम ने चार अप्रशिक्षित बस चालकों को तारादेवी वोल्वो यूनिट में तैनात किया है। यही नहीं चार अगस्त, 2022 को अप्रशिक्षित बस चालक रमेश चंद को अकेले ही शिमला-कटड़ा रूट पर भेज दिया गया। पांच अगस्त, 2022 को योगराज को इसी रूट पर सवारियों से भरी बस में प्रशिक्षण के लिए तैनात किया गया है। इसी तरह दिल्ली-शिमला रूट पर सुरेंद्र कु मार को भी प्रशिक्षण के लिए भेजा गया है। इसकी पुष्टि याचिकाकर्ता के अधिवक्ता नरेश कॉल ने की है। आरोप लगाया है कि अप्रशिक्षित चालकों को फायदा पहुंचाने के लिए निगम सवारियों की जिंदगी के साथ खिलवाड़ कर रहा है। मामले की सुनवाई तीन सप्ताह के बाद निर्धारित की गई है। 


अवैध स्टोन क्रशर चलाने पर हाईकोर्ट ने तलब की ताजा रिपोर्ट
उदयपुर के भीमबाग में अवैध स्टोन क्रशर चलाने के मामले में प्रदेश हाईकोर्ट ने ताजा रिपोर्ट तलब की है। प्रतिवादी जय राम ने आवेदन के माध्यम से अदालत को बताया कि उसने जुर्माने के 65 हजार रुपये जमा कर दिए हैं। अदालत को यह भी अवगत करवाया गया कि वन विभाग ने 21 जून, 2022 को विवादित भूमि की निशानदेही कर ली है। प्रतिवादी ने निशानदेही में वन विभाग की भूमि को खाली कर दिया गया है। वन विभाग ने इस भूमि पर बाड़ा भी लगा दिया है। प्रतिवादी ने आवेदन के माध्यम से गुहार लगाई है कि इन तथ्यों को देखते हुए आगामी आदेश पारित किए जाएं। 

मुख्य न्यायाधीश के नाम लिखे पत्र पर हाईकोर्ट ने इस मामले में संज्ञान लिया है। पत्र में आरोप लगाया गया है कि प्रतिवादी जय राम पिछले दो वर्षों से अवैध स्टोन क्रशर चला रहा है। सतधारा के नाम से चलाया जा रहा यह क्रशर सीमा सड़क संगठन की सड़क पर ही स्थापित किया है। इस मामले में राज्य सरकार ने शपथपत्र के माध्यम से बताया है कि प्रतिवादी जय राम को कारण बताओ नोटिस जारी कर दिया गया है। इसके तहत उसे  वन विभाग की भूमि को खाली करने और 1.2 करोड़ की रॉयल्टी देने बारे कहा गया है। जिलाधीश लाहौल-स्पीति ने राज्य भूवैज्ञानिक को आदेश दिए हैं कि प्रतिवादी के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। मामले की आगामी सुनवाई 24 अगस्त को निर्धारित की गई है। 

 

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