इस बार एक माह पहले ही खुल जाएगा रोहतांग दर्रा, मनाली-लेह हाईवे से बर्फ हटाने का काम शुरू

अमर उजाला नेटवर्क, केलांग/कोकसर (लाहौल-स्पीति) Published by: Krishan Singh Updated Thu, 20 Feb 2020 05:40 PM IST
मनाली- लेह मार्ग
मनाली- लेह मार्ग - फोटो : अमर उजाला
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देश के सबसे ऊंचे मनाली-लेह हाईवे को बहाल करने के लिए बर्फ हटाने का काम शुरू हो गया है। पिछली बार से 10 दिन पूर्व ही सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) के दीपक और हिमांक प्रोजेक्ट की तीन कंपनियां जुट गई हैं। गुरुवार को दीपक परियोजना के मुख्य अभियंता एमएस बाघी ने गुलाबा से चार किलोमीटर आगे राहलाफाल से विधिवत पूजा-अर्चना के बाद अभियान शुरू किया।
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उधर, केलांग के दारचा से भी बर्फ हटाने के अभियान को हरी झंडी दी गई है। मौसम साफ रहा तो इस बार एक माह पहले ही रोहतांग दर्रा ट्रैफिक के लिए खुल जाएगा। तांदी जीरो प्वाइंट से गोंदला के खंगसर तक 94 आरसीसी और वहां से टनल के नार्थ पोर्टल गुफा होटल तक 70 आरसीसी सड़क मार्ग को पहले ही बहाल कर चुका है।

कोकसर से आगे रोहतांग की तरफ बीआरओ का 94 आरसीसी मोर्चा संभालेगा

बीआरओ की टीम
बीआरओ की टीम - फोटो : अमर उजाला
गुफा होटल से कोकसर तक 10 किमी के दायरे में जगह-जगह हिमखंड खिसकने के कारण बीआरओ को कोकसर तक पहुंचने में खूब पसीना बहाना पड़ेगा। कोकसर से आगे रोहतांग की तरफ बीआरओ का 94 आरसीसी मोर्चा संभालेगा।

उधर, 70 आरसीसी ने दारचा से बारालाचा की तरफ बर्फ हटाने के काम में तेजी लाई है। 70 आरसीसी के ओसी कर्नल दीपक बिष्ट ने कहा कि रोहतांग दर्रे की तरफ बर्फ हटाने का काम शुरू कर दिया गया है। मौसम अनुकूल रहा तो इस बार रिकॉर्ड समय के भीतर रोहतांग दर्रा बहाल किया जाएगा। 

रोहतांग दर्रा बहाल कर लाहौल का संपर्क मनाली से जोड़ना उनकी प्राथमिकता होगी। बर्फ हटाने के लिए दो अत्याधुनिक मशीनें लगाई गई हैं, जो रोहतांग दर्रे से बर्फ की मोटी चादर को काटेंगी। ब्रिगेडियर एमएस बाघी, चीफ इंजीनियर 

रोहतांग दर्रे से पहली बार मानव रहित स्नोकटर हटाएगा बर्फ

अब रोहतांग दर्रे से बर्फ की मोटी दीवार को भेदकर रास्ता निकालना बीआरओ के  लिए आसान होने वाला है। बीआरओ के पास पहली बार इटालियन निर्मित एफआरएसआईए (फ्रसिया) स्नोकटर पहुंचा है। यह मानवरहित स्वचालित स्नोकटर है, जिसे 500 मीटर दूर बैठकर रिमोट से नियंत्रित किया जा सकेगा। इसके इस्तेमाल से बीआरओ के जवान भी हिमखंड की चपेट में आने से सुरक्षित रहेंगे। फ्रसिया स्नोकटर के साथ एक बुलडोजर भी जुड़ गया है। यह एक घंटे में 5000 टन बर्फ हटा सकता है। बीआरओ के मुताबिक बेमल कंपनी के बनाए डी 50 बुलडोजर के अंदर करोड़ों रुपये की लागत से आधुनिक उपकरण जुड़ी स्वचालित मशीन है।

बीआरओ के दीपक परियोजना के मुख्य अभियंता ब्रिगेडियर एमएस बाघी ने कहा कि फ्रसिया एक अत्याधुनिक स्नोकटर है। यह दोगुनी रफ्तार से बर्फ हटाने का काम करेगा। यही नहीं, यह मशीन 18500 फीट से अधिक ऊंचाई पर काम कर सकती है।  यह डेढ़ मीटर ऊंची और 300 मीटर लंबी संचित बर्फ को एक घंटे में हटा सकती है। बेमल कंपनी के बनाए बुलडोजर डी-50 को रक्षा अनुसंधान विकास संगठन (डीआरडीओ) चेन्नई ने मोडिफाई किया है। बीआरओ के 38 सीमा सड़क संगठन कृतिक बल के कमांडर कर्नल उमा शंकर ने कहा कि आधुनिक तकनीक से निर्मित बुलडोजर से एवलांच प्रोन क्षेत्र में ऑपरेटरों को जाने की जरूरत नहीं रहेगी। फिलहाल मशीन को ट्रायल के तौर पर मैनुअली चलाया जा रहा है।
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