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भाजपा के लिए गले की फांस बना नए मेयर और डिप्टी मेयर का चुनाव

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिमला Published by: शिमला ब्यूरो Updated Thu, 19 Dec 2019 11:00 PM IST
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mc shimla mayor and deputy mayor
- फोटो : अमर उजाला
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नगर निगम के भाजपा समर्थित पार्षदों ने भले ही मेयर और डिप्टी मेयर के चुनाव में पार्टी से बगावत कर क्रॉस वोटिंग नहीं की हो लेकिन दिल से नए मेयर और डिप्टी मेयर को स्वीकार भी नहीं किया है। इस चुनाव के बाद भड़की सियासी चिंगारी अंदर ही अंदर सुलग रही है, इसे शांत नहीं किया तो आने वाले दिनों में और घमासान मचने के आसार हैं।
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वीरवार को टाउन हॉल स्थित मेयर आफिस में शाम साढ़े पांच बजे हुए हवन में कई पार्षदों ने शिरकत नहीं की। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज भी हवन में शामिल हुए लेकिन निगम के बीजेपी समर्थित 21 पार्षदों में से महज 11 ने ही मौजूदगी दर्ज करवाई। हवन के लिए पार्षदों को फोन करके बुलाया था। बुधवार को नगर निगम के मेयर डिप्टी मेयर चुनावों में भाजपा समर्थित 21 पार्षदों ने मेयर सत्या कौंडल और डिप्टी मेयर शैलेंद्र चौहान के पक्ष में वोटिंग की थी। लेकिन सत्या और शैलेंद्र के जीतने के बावजूद पूर्व मेयर कुसुम सदरेट सहित अन्य भाजपा पार्षद जीत के जश्न में शामिल नहीं हुए। वीरवार को मेयर आफिस में हुए हवन में नाराजगी खुल कर सामने आ गई। नाराज पार्षदों ने नए मेयर और डिप्टी मेयर ही नहीं बल्कि संगठन और सरकार को भी बड़ा संकेत दे दिया कि वह इस फैसले से खुश नहीं।

पूर्व मेयर और डिप्टी मेयर को न्योता ही नहीं दिया
नगर निगम की पूर्व मेयर कुसुम सदरेट और डिप्टी मेयर राकेश शर्मा सहित अन्य पार्षदों को हवन का न्यौता ही नहीं दिया गया। कांग्रेस के पार्षदों को भी हवन में आमंत्रित नहीं किया गया था। हालांकि मेयर के परिजन भी हवन में शामिल हुए। मंत्री के खिलाफ तल्ख टिप्पणी करने वाले वरिष्ठ पार्षद संजीव ठाकुर को भी नहीं बुलाया था। उन्होंने कहा जब निमंत्रण ही नहीं मिला तो वह कैसे जाते? सियासी गलियारों में चरचा है कि पार्टी के लिए यह गुटबाजी आगे चलते घातक साबित हो सकती है। नाराज खेमे को इस आयोजन में न बुलाकर एमसी में ओहदे हासिल करने वालों ने आग में घी डालने वाला काम किया है।
पार्षदों को न्योता भेजा नहीं, सबको
साथ लेकर चलने के किए गए दावे
टाउन हाल पहुंचने पर मेयर सत्या कौंडल और डिप्टी मेयर शैलेंद्र चौहान ने दावा किया कि शहर के सभी 34 पार्षदों के सहयोग से वह शहर का विकास करवाएंगे। सभी पार्षदों का सहयोग लिया जाएगा और हर वार्ड का समान विकास किया जाएगा। लेकिन भाजपा के पार्षद ही इनसे कन्नी काट रहे हैं और इन पर अभी से भाजपा पार्षद पिक एंड चूज का आरोप लगाने लगे हैं। ऐसे में कैसे सबको साथ लेकर शहर का विकास कर पाएंगे। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज और महापौर सत्या कौंडल ने दावा किया है कि ढाई साल के भीतर शिमला शहर को स्मार्ट सिटी बनाए देंगे। क्या ऐसी खींचतान में यह संभव है? आम जनता की ओर से यह सवाल उठाए जा रहे हैं।

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