क्रिकेट मैच के सहारे मेजर की सियासी जंग

सुनील चड्ढा/अमर उजाला, धर्मशाला Updated Thu, 03 Mar 2016 11:11 PM IST
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सेना में रहकर देश के दुश्मनों से लोहा लेने के बाद राजनीति में आकर कभी सीधे मुख्यमंत्री वीरभद्र को ललकारकर हिमाचल की सियासत में भूचाल लाने वाले मेजर विजय सिंह मनकोटिया ने क्रिकेट की कूटनीति को राजनीतिक धुरी बनाकर सियासी जंग का एलान कर दिया है।
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लंबे समय से राजनीतिक अवसाद झेल रहे शाहपुर से विधायक और मंत्री रहे मेजर विजय सिंह मनकोटिया के लिए भारत-पाक मैच संजीवनी बनकर उभरा है। ऐसे में क्रिकेट की कूटनीति पर पूर्व सैनिकों का सहारा लेकर मनकोटिया ने सियासी जंग का एलान कर दिया है।
अनुराग से मुलाकात कर सीएम की ओर से गेंद पूर्व सैनिकों के पाले में डालने के बाद मनकोटिया ने भारत-पाक मैच को लेकर तेवर कड़े कर दिए हैं। उन्होंने साफ कर दिया है कि मैच किसी भी सूरत में नहीं होने दिया जाएगा। इसके खिलाफ मनकोटिया का ऑपरेशन बलिदान उनकी नई सियासी पारी की धुरी बनेगा।
मुख्यमंत्री वीरभद्र के खिलाफ विवादित सीडी चलाने के बाद विधानसभा चुनाव से पहले वर्ष 2007 में मनकोटिया को कांग्रेस ने निलंबित कर दिया था। इसके बाद मनकोटिया ने बसपा ज्वाइन कर मुख्यमंत्री पद के उम्मीदवार के तौर पर धर्मशाला से भाजपा प्रत्याशी किशन कपूर के खिलाफ चुनाव लड़ा था।

इस चुनाव में मनकोटिया को जीत नसीब नहीं हो पाई। इसके बाद 2012 के विधानसभा चुनाव में मनकोटिया की कांग्रेस में वापसी हुई। उन्हें शाहपुर से टिकट मिला, लेकिन उन्हें हार का मुंह देखना पड़ा। इसके बाद कांग्रेस में साइड लाइन कर दिया गया। वर्ष 2014 में लोकसभा चुनाव आए और मनकोटिया को मनाने खुद मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह आगे आए।

मनकोटिया ने साथ देने के लिए हामी भरी। इस दौरान राहुल गांधी की ओर से की गई पूर्व सैनिकों की रैली में भी मनकोटिया की अनदेखी की गई। इसी बीच उन्हीं की ही पार्टी के केवल सिंह पठानिया उनके लिए परेशानी बन गए, क्योंकि मनकोटिया के निलंबन के बाद वर्ष 2007 में शाहपुर से पार्टी ने केवल सिंह पठानिया को टिकट दिया था।

अब मेजर ने सीएम से नजदीकियां बढ़ाना शुरू कर दी हैं। इसका नतीजा क्रिकेट की कूटनीति बनकर उभरी है। दरअसल, वीरभद्र और अनुराग के बीच छत्तीस के आंकड़े से हिमाचल की राजनीति वाकिफ है। राजनीतिक जानकार मानते हैं कि ऐसे में अब सीएम का साथ देकर मनकोटिया अपने खोए हुए सियासी रुतबे को पाना चाहते हैं।
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