हिमाचल विधानसभा सत्र: विपक्ष के विरोध के बीच पर्यटन और युद्ध जागीर बिल पारित

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Updated Tue, 15 Sep 2020 06:35 PM IST
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हिमाचल विधानसभा - फोटो : अमर उजाला

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विपक्ष के विरोध के बीच सदन में मंगलवार को पर्यटन और युद्ध जागीर बिल पारित कर दिए गए। राज्य पर्यटन विकास बोर्ड में उपाध्यक्ष के मनोनयन के बिल का विपक्ष ने विरोध किया। कोविड काल में इस बिल को गलत बताया गया। विपक्ष ने कहा कि सरकार इस समय आर्थिक संकट से गुजर रही है। फिजूलखर्ची रोकने के लिए इस बिल को वापस लेना चाहिए। विपक्ष ने युद्ध जागीर को सात हजार से बढ़ाकर 10 हजार करने की मांग भी उठाई। हालांकि, बाद में नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री, कांग्रेस विधायक जगत सिंह नेगी और माकपा विधायक राकेश सिंघा के पुनर्विचार के लिए लाए गए संशोधन प्रस्ताव ध्वनिमत से गिर गए। 
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नेगी ने कहा कि एक ही संस्था में तीन-तीन तरह के कारपोरेशन, विभाग और बोर्ड हैं। इनके इतने सारे अधिकारी और इतने सारे चेयरमैन हैं। बोर्ड का क्या काम होगा। अध्यक्षों की बहुत बड़ी फौज खड़ी कर दी गई है। यह किसी भी तरह का काम नहीं करती है। हिमाचल जो पहले ही कर्ज में डूबा हुआ है, वहां हालत सही नहीं है। छुटभैया नेता को इस पद पर बैठाने की तैयारी चल रही है। हमारी तनख्वाह जो कोविड में दी गई, वह चेयरमैन खा रहे हैं। उन्होंने कहा कि अगर उपाध्यक्ष बनाए ही जाने हैं तो विधायकों में से किसी को बनाया जाए। इससे खर्च अधिक नहीं पड़ेगा। माकपा विधायक राकेश सिंघा ने कहा कि कोरोना वायरस के चलते इसे आगे स्थगित कर दिया जाए। जनता के बीच इसको लेकर अच्छा संदेश नहीं जाएगा। वायरस के जाने के बाद एक की जगह दो को उपाध्यक्ष लगा देना। 
नेता प्रतिपक्ष मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि यह ऐसे बिल लाने का समय नहीं है। कैग ने बीते रोज ही कहा है कि कर्जे बढ़ रहे हैं। खर्चे बढ़ाए गए हैं। कैग ने कुछ निगमों-बोर्डों को तो खत्म करने की भी बात की है। सरकार को नैतिकता के आधार पर फैसला लेना चाहिए। कांग्रेस विधायकों ने युद्ध जागीर की राशि को नाकाफी बताते हुए इसे बढ़ाने की मांग की। कहा, उपाध्यक्ष बनाने के लिए तो सरकार के पास बजट है लेकिन युद्ध जागीर को पैसा देने के लिए जेब खाली दिखाई जा रही है। विपक्ष ने युद्ध जागीर को प्रति माह दस हजार रुपये करने की मांग उठाई। इस पर शहरी विकास मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि युद्ध जागीर के मामले में बजट घोषणा को लागू किया है। 1972 में 2500 को यह दिया जाता था। अब संख्या 452 रह गई है। अगले साल मुख्यमंत्री चाहेंगे तो राशि बढ़ाने पर विचार होगा। 
उपाध्यक्ष के लिए किया है भत्तों का प्रावधान
 जवाब में मुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल प्रदेश पर्यटन राज्य है। यहां बड़ी संभावनाएं हैं। उस दृष्टि से जब हम सत्ता में नहीं थे तो 2002 में बोर्ड का गठन किया गया। इस बोर्ड में मनकोटिया उपाध्यक्ष रहे, बाद में उन्होंने त्यागपत्र भी दिया। चेयरमैन का पद हमेशा सीएम के पास रहता है। अगर कभी मंत्री को पर्यटन विभाग दिया गया तो वे वरिष्ठ उपाध्यक्ष होंगे। मुख्यमंत्री अध्यक्ष ही रहेंगे। गैर सरकारी सदस्यों के लिए नए प्रावधान नहीं हैं। उपाध्यक्ष के लिए भी भत्तों का प्रावधान किया गया है। गैर सरकारी सदस्यों को सरकार ही मनोनीत करती है तो सरकार ही मनोनीत करेगी।
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