मंत्री बनते ही राकेश पठानिया त्रिदेवों के दर पर नतमस्तक

प्रवीण कुमार, अमर उजाला नेटवर्क, हमीरपुर Updated Mon, 03 Aug 2020 10:57 AM IST
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forest minister Rakesh Pathania meets shanta kumar and prem kumar dhumal
- फोटो : अमर उजाला

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जयराम सरकार में वन एवं खेल मंत्री बने राकेश पठानिया अब त्रिदेवों (नड्डा, शांता और धूमल) के दर पर नतमस्तक हो गए हैं। मुख्यमंत्री जयराम ठाकुर की कैबिनेट में मंत्री बनने के बाद वह सीधे पूर्व मुख्यमंत्री शांता कुमार से मिलने पालमपुर पहुंचे। हालांकि, शिमला से नेशनल हाईवे हमीरपुर होकर ही कांगड़ा की ओर जाता है लेकिन वह बिलासपुर के घाघस से यू-टर्न लेकर मंडी के रास्ते पहले पालमपुर पहुंचे।
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यहां पर शांता कुमार से आशीर्वाद लिया और सरकार व संगठन को लेकर चर्चा की। रविवार को वह पालमपुर से सीधे हमीरपुर के समीरपुर पहुंच गए। यहां उन्होंने पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल को टोपी और शॉल भेंट कर उनका भी आशीर्वाद लिया। रविवार दोपहर सवा बारह बजे से एक बजे तक करीब पौना घंटा मुलाकात कर कई विषयों पर चर्चा की। हालांकि, पूर्व में दोनों मुख्यमंत्रियों पर राकेश पठानिया का विधानसभा टिकट काटने के आरोप लगते रहे हैं।
धूमल प्रदेश में दूसरी बार मुख्यमंत्री बने तो विधानसभा चुनाव में नूरपुर हलके से राकेश पठानिया का टिकट कट गया। यहां पर उनकी जगह मालविका पठानिया को भाजपा ने अपना प्रत्याशी बनाकर चुनावी रण में उतारा। लेकिन राकेश पठानिया ने भाजपा प्रत्याशी की जमानत जब्त करवाकर विधानसभा की दहलीज पर कदम रख दिया। वह धूमल सरकार में भाजपा के एसोसिएट विधायक रहे। दूसरी बार फिर से उनका टिकट कट गया। तब शांता कुमार का नाम उछला। वर्ष 2012 में नूरपुर से राकेश का टिकट काटकर भाजपा ने रणवीर सिंह उर्फ निक्का को टिकट थमा दिया।
लेकिन उस समय विधायक राकेश पठानिया और भाजपा प्रत्याशी निक्का दोनों को हार का सामना करना पड़ा। यहां से कांग्रेस प्रत्याशी अजय महाजन ने जीत का परचम लहराया। लेकिन भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा की कश्ती पर सवार होकर राकेश पठानिया वर्ष 2017 के चुनाव में भाजपा से टिकट हासिल करने में कामयाब रहे और चुनाव भी जीते। लेकिन ढाई साल तक वह मंत्री पद की कुर्सी से दूर रहे। अब पठानिया वन एवं खेल मंत्री बनने में कामयाब हो गए।  

नरेंद्र ठाकुर भी पहुंचे समीरपुर
मंत्री पद की दौड़ से बाहर होने वाले हमीरपुर सदर से विधायक नरेंद्र ठाकुर भी अचानक बदले-बदले नजर आ रहे हैं। रविवार को मंत्री राकेश पठानिया के साथ वह भी धूमल से मिलने समीरपुर पहुंचे। हालांकि, पूर्व में नरेंद्र और धूमल के बीच के रिश्ते कुछ ज्यादा ठीक नहीं रहे। पिछले ढाई साल में दोनों नेताओं के बीच बहुत कम मुलाकातें र्हुइं। लेकिन नरेंद्र ठाकुर का अचानक धूमल से यूं मिलना हमीरपुर की राजनीति के लिए अच्छे संकेत माने जा रहे हैं।
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