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कई बड़े अफसर, कर्मचारी आएंगे पुलिस जांच की जद में

Shimla	 Bureauशिमला ब्यूरो Updated Sun, 25 Aug 2019 06:57 PM IST
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शिमला। जिला प्रशासन की नाक तले ड्राइविंग लाइसेंस बनाने का फर्जीवाड़ा सामने आने के बाद हाईटेक व्यवस्था की पोल खुल गई है। फर्जी तरीके से करीब आधा दर्जन ड्राइविंग लाइसेंस बन पाते। इससे पहले फर्जीवाड़े का खुलासा हो गया। करीब आधा दर्जन फर्जी तरीके से तैयार किए ड्राइविंग लाइसेंस के दस्तावेज बनाए गए थे। पुलिस जांच में लाइसेंस ब्रांच के कई अधिकारी और कर्मचारियों के नामों का खुलासा हो सकता है। लाइसेंस ब्रांच के कर्मचारियों पर गाज गिरना तय है। फर्जी ड्राइविंग लाइसेेंस बनाने का धंधा कई महीनों से चल रहा था। इस मामले में जिला परिसर में एक गिरोह के भी सक्रिय होने का अंदेशा जताया जा रहा है। पुलिस जांच में लाइसेंस ब्रांच कई अधिकारी और कर्मचारियों के नामों का खुलासा हो सकता है। सवाल यह उठता है कि हाईटेक व्यवस्था होने के बाद आखिर कैसे फर्जीवाड़े को अंजाम दिया जा रहा था। ड्राइविंग लाइसेंस बनाने के लिए टेस्ट देना पड़ता है। इसके अलावा टेस्ट के दौरान रिकॉर्ड के तौर पर वीडियोग्राफी भी होती है। क्या फर्जी तरीके से बनाए जा रहे इन लोगों ने ड्राइविंग टेस्ट दिया था। यदि दिया था तो फिर दस्तावेेजों पर एसडीएम के फर्जी साइन करने की जरूरत क्या पढ़ी। इसके अलावा यदि ड्राइविंग टेस्ट नहीं दिया तो फिर एसडीएम के पास उनके फर्जी साइन किए हुए दस्तावेज कैसे पहुंचे। ऐसे में कार्यालय के अधिकारियों और कर्मचारी भी जांच में दायरे में आएंगे।
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एमवीआई ने प्रशासन को पहले की करवा दिया था अवगत
मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर समीर दत्ता ने बताया कि उन्होंने पहले से इस तरह के फर्जीवाड़े की आशंका थी। उन्होंने इस बारे में पहले से ही जिला प्रशासन और परिवहन के अधिकारियों को इसकी सूचना दी थी।
एसडीएम शहरी ने पकड़ा है फर्जीवाड़ा
राजधानी के उपमंडलाधिकारी कार्यालय (शहरी) लाइसेंस ब्रांच में करीब आधा दर्जन फर्जी तरीके से तैयार किए ड्राइविंग लाइसेंस के दस्तावेजों बनाए गए थे। उपमंडलाधिकारी शहरी नीरज चांदला ने इस फर्जीवाड़े को पकड़ा है। इसमें उनके अपने साइन फर्जी किए हुए थे। एसडीएम शहरी जब लाइसेंस के फाइनल अप्रूवल के लिए दस्तावेजों की जांच कर रही थीं तो उन्हें दस्तावेजों पर हुए अपने साइन फर्जी लगे। इसके बाद उन्होंने दूसरे दस्तावेज भी चेक किए। इसमें एक के बाद एक लगातार करीब छह लाइसेंसों पर उनके फर्जी साइन पाए गए। ये लाइसेंस मोटरसाइकिल और गाड़ी के लिए बनाए जा रहे थे। मामला सामने आने के बाद एसडीएम कार्यालय ने अपने स्तर पर इसकी जांच की और पाया गया कि करीब छह लाइसेंसों पर एसडीएम के फर्जी साइन हुए थे। हालांकि, इन सभी दस्तावेजों पर मोटर व्हीकल इंस्पेक्टर के साइन पहले से हुए थे।
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