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कोरोना वायरस: आईजीएमसी शिमला और टांडा में बढ़ने लगा मरीजों का दबाव

अमर उजाला नेटवर्क, शिमला Published by: Krishan Singh Updated Tue, 13 Apr 2021 09:51 AM IST

सार

  • कोरोना मामलों की रफ्तार बढ़ती रही तो जोनल अस्पतालों में शिफ्ट होंगे कोरोना मरीज 
  • हिमाचल सरकार ने मेडिकल कॉलेज प्रशासनों को भी व्यवस्था करने को  कहा 
  • धर्मशाला कोविड सेंटर, मेक शिफ्ट अस्पताल में तीन जिलों से शिफ्ट हो रहे हैं मरीज 
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आईजीएमसी शिमला
आईजीएमसी शिमला - फोटो : अमर उजाला

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विस्तार

हिमाचल प्रदेश में कोरोना विकराल रूप धारण करने लगा है। राज्य में प्रतिदिन पांच सौ से अधिक पॉजिटिव मामले दर्ज हो रहे हैं। इनमें 5 से 10 फीसदी लोग गंभीर अवस्था में आ रहे हैं। इन्हें अस्पतालों में शिफ्ट करना पड़ रहा है। इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज का वार्ड और मेक शिफ्ट अस्पताल कोरोना मरीजों से भर गया है। धर्मशाला के कोविड सेंटर में 120 और मेक शिफ्ट अस्पताल 66 बिस्तर हैं।
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इनमें प्रतिदिन 60 से 80 के बीच कोरोना मरीज भर्ती होते हैं। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि ऐसे ही कोरोना केस बढ़ते रहे तो जोनल अस्पतालों में भी मरीजों को शिफ्ट करना पड़ेगा। हालांकि, सरकार ने मेडिकल कॉलेजों के प्राचार्यों से कोविड मरीजों के लिए व्यवस्था करने को कहा है। मेडिकल कॉलेजों में ओपीडी और ऑपरेशन प्रभावित न हों, इसका भी ध्यान रखने के लिए कहा है।कोविड सेंटर धर्मशाला और मेक शिफ्ट अस्पताल टांडा में मरीजों का अतिरिक्त बोझ पड़ रहा है। यहां तीन जिलों कांगड़ा, ऊना और चंबा के गंभीर मरीजों को शिफ्ट किया जा रहा है।


इंदिरा गांधी मेडिकल कॉलेज (आईजीएमसी) में भी जिला शिमला, सोलन, बिलासपुर और सिरमौर से कोरोना मरीज शिफ्ट किए जा रहे हैं। यहां भी करीब 70 मरीज उपचाराधीन हैं। जिस तरह मामले बढ़ रहे हैं, उससे बिस्तर की कमी खल सकती है। सरकार का मानना है कि प्रदेश में 300 से अधिक कोविड सेंटर बनाए गए हैं। जैसे-जैसे मरीजों की संख्या बढ़ रही है, इन सेंटरों में मरीजों को भेजा रहा है। कुल्लू, लाहौल-स्पीति, किन्नौर तीन जिलों में कोरोना के मामले कम हैं। ऐसे में यहां सेंटर बंद रखे गए हैं। सरकार ने डॉक्टरों की छुट्टियों पर रोक लगाई है। 

हिमाचल में डेथ रेट बढ़ा, रिकवरी रेट घटा
कोरोना के लगातार मामले बढ़ने और लोगों की मौत होने से प्रदेश में डेथ रेट 1.8 फीसदी हो गया है। रिकवरी रेट 94 से घटकर 93 फीसदी हो गया है। प्रदेश में एक्टिव मरीजों की संख्या 7 हजार करीब है।  
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