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आडिट रिपोर्ट में खुलासा, कंपनी ने गुपचुप बेचे हजारों मीटर और लोहे का कबाड़

Shimla	 Bureau शिमला ब्यूरो
Updated Wed, 07 Apr 2021 11:52 PM IST
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Audit Report taken objection on sale of scrap
Audit Report taken objection on sale of scrap

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निदेशक मंडल की बैठक में रखी ऑडिट रिपोर्ट में कंपनी पर उठाए हैं सवाल
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नगर निगम से नहीं ली गई मंजूरी, जांच में सामने आई थी लापरवाही
अमर उजाला ब्यूरो
शिमला। राजधानी में पांच हजार से अधिक पानी के पुराने मीटरों समेत लोहे और पीतल का लाखों रुपये का कबाड़ बेचने के मामले में पेयजल कंपनी फिर सवालों के घेरे में आ गई है।
नगर निगम की जांच के बाद अब कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट में भी इस कबाड़ की नीलामी पर सवाल उठाए गए हैं। रिपोर्ट के अनुसार यह नीलामी नियमों की अनदेखी करते हुए नगर निगम की अनुमति लिए बिना की गई। नियमानुसार नगर निगम से मंजूरी मिलने के बाद ही इस कबाड़ की नीलामी की जा सकती थी, लेकिन कंपनी ने निगम को सूचना तक नहीं दी। कुल 2.34 लाख रुपये में यह कबाड़ बेचा था।

मुख्य सचिव अनिल खाची की अध्यक्षता में मंगलवार को हुई निदेशक मंडल की बैठक में भी कंपनी की ऑडिट रिपोर्ट पेश की थी। हालांकि, इस बैठक में रिपोर्ट पर ज्यादा चर्चा नहीं हुई लेकिन आने वाले दिनों में सरकार इस मामले पर कार्रवाई कर सकती है। ऑडिट में लगाई गई इस आपत्ति पर कंपनी की ओर से जांच करने का हवाला दिया है। कंपनी का कहना है कि इस मामले की जांच की गई है। इसकी रिपोर्ट सरकार को भेजी जा चुकी है। जांच रिपोर्ट पर अब सरकार ने फैसला लेना है। कबाड़ बेचने को लेकर पेयजल कंपनी पहले भी विवादों में घिर चुकी है।
रिजर्व वैल्यू पर बेच दिया था सामान
पेयजल कंपनी ने लाखों रुपये का सामान नीलामी के लिए रखी रिजर्व वैल्यू पर ही बेच दिया था। इसमें पानी के पुराने खराब हो चुके 5300 से अधिक मीटर भी शामिल थे जो स्टोर में रखे थे। लोहे की टूटी हुई पाइपें और लोहे व तांबे का दूसरा सामान भी बेचा था। लोहे का सामान भी रिजर्व वैल्यू पर ही महज दस रुपये प्रति किलो की दर से नीलाम किया था जबकि बाजार में उस समय इस पुराने लोहे की कीमत 15 से 18 रुपये तक थी। पेयजल मीटर भी 150 रुपये की दर से बेचे गए। नीलामी नगर निगम से पूछे बिना की गई जिस पर सदन में हंगामा हुआ था। पार्षदों ने अंदेशा जताया था कि इस कबाड़ की कीमत कई गुना ज्यादा हो सकती थी, लेकिन कंपनी ने गुपचुप यह नीलामी कर दी। बाद में इस मामले पर जांच बिठाई गई। फिलहाल सरकार को भेजी गई जांच रिपोर्ट पर कोई फैसला नहीं लिया है।
2018 से 2020 तक की है यह रिपोर्ट
पेयजल कंपनी का साल 2018 से 2020 तक की अवधि का ऑडिट हुआ है। यह ऑडिट बीते साल अगस्त और सितंबर माह में हुआ है। अब इसकी रिपोर्ट आ गई है।

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