19 गांवों ने किया चुनाव का बहिष्कार

Shimla Updated Thu, 08 May 2014 05:31 AM IST
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शिमला। मूलभूत सुविधाओं को तरस रही प्रदेश के करीब 19 गांवों के बाशिंदों ने लोकतंत्र के महायज्ञ में पूर्णाहुति नहीं डाली। आजादी के 67 साल बाद भी कहीं न तो सड़क है तो कहीं पुल बनाने की मांग पूरी नहीं हो पाई है। पैदल रास्तों की दयनीय हालत और स्कूल में स्टाफ की कमी पर भी लोगों ने चुनाव से किनारा कर लिया। लोगों का आरोप है कि ग्रामीण भी चुनावों को समय किए वायदों को भूल जाते हैं।
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मनाली के प्रसिद्ध पर्यटन स्थल सोलंगनाला के सोलंग गांव के बाशिंदों ने मतदान नहीं किया। ग्रामीण गांव के लिए पुल न होने के कारण 2013 के लोस उप चुनाव का भी बहिष्कार कर चुके हैं। गांव में ब्यास नदी पर बना पुराना पुल वर्ष 2005 की बाढ़ में बह गया था।
कुल्लू और लाहौल-स्पीति के करीब नौ से अधिक पोलिंग बूथों पर लोगों ने वोट नहीं डाला। कुछ पोलिंग बूथों पर इक्का, दुक्का वोट ही पड़े। सड़क की मांग पर लोगों ने चुनाव का बहिष्कार किया है।
आनी विस क्षेत्र के दो पोलिंग बूथों पर एक भी वोट नहीं पड़ा। बखनाओं और शिल्ली पंचायत के लोगों ने क्षेत्र की समस्याएं हल न होने के विरोध में चुनाव का बहिष्कार किया। गाड बूथ नंबर 44 और निरमंड खंड के बश्ला बूथ नंबर 82 में एक भी वोट नहीं पड़ा। वहीं, मंडी जिले के करसोग विस क्षेत्र में दो पोलिंग बूथों पर ग्रामीणों ने सड़क सुविधा न मिलने पर मतदान का बहिष्कार किया। परलोग बूथ पर मात्र एक ही वोट पड़ा था। माजू गांव के लोगों ने भी वोट नहीं डाला। चंबा जिले की बड़ग्रां पंचायत के भादरा पोलिंग बूथ पर एक भी ग्रामीण मतदान करने नहीं पहुंचा। प्रधान छैला देवी ने बताया कि मांगें पूरा न होने पर चुनाव का बहिष्कार किया है।
भटियात की जंदरोग पंचायत के चक्की पोलिंग बूथ पर एक भी मतदाता वोट देने नहीं पहुंचा। लोगों का कहना है कि गांव में कोई बीमार हो जाए तो लगभग 11 किलोमीटर पैदल सफर कर मरीज को पालकी में स्वास्थ्य केंद्र तक लाना पड़ता है। कई बार मरीज रास्ते में दम तोड़ देते हैं। सहायक निर्वाचन अधिकारी एवं एसडीएम अमित मेहरा ने बताया कि मतदाताआें को मत का प्रयोग अवश्य करना चाहिए। उनके पास नोटा का विकल्प भी है।
कांगड़ा जिले के शाहपुर हलके की पंचायत परगोड़ के गांव कलरू के मतदान केंद्र-77 में एक भी वोट नहीं डाला गया। यहां के लोग गज खड्ड पर पुल न बनने से गुस्से में हैं। उधर, मतदान केंद्र 77 कलरू के मतदान अधिकारी यशपाल ने भी माना कि केंद्र में एक भी मत नहीं पड़ा।
वहीं, सुजानपुर विस क्षेत्र के गांव नाग लंबर के ग्रामीणों ने लोस चुनावों का बहिष्कार किया। गांव के किसी भी मतदाता ने मतदान में भाग नहीं लिया। यहां तक कि मतदान केंद्र पर राजनीतिक दलों के एजेंटों ने भी अपना मत नहीं डाला।
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