डाक्टर सोते रहे, मरीज तड़पकर मर गया

Shimla Updated Sat, 23 Nov 2013 05:44 AM IST
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शिमला। आइजीएमसी शिमला में डाक्टरों की कथित लापरवाही बीसीएस के युवक राजकुमार पर इतनी भारी पड़ी कि उसे अपनी जान से हाथ धोना पड़ा।
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मृतक युवक के मामा जनरैल सिंह और भाई मनी राम ने बताया कि 29 साल के राजकुमार को बुधवार को शोघी के करीब एक कार दुर्घटना में दाईं टांग में फ्रेक्चर आ गया था। यहां से उसे आइजीएमसी ले जाया गया। वहां डाक्टरों ने टांग की सर्जरी करने की सलाह दी। वीरवार दोपहर बाद हुई सर्जरी के बाद राजकुमार की हालत स्थिर लग रही थी लेकिन शाम को जैसे ही उसे खून चढ़ाना शुरू किया गया, उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने आरोप लगाया कि खून चढ़ने के बजाय बाहर निकल रहा था लेकिन इस बात की परवाह किए बिना उसे 5 यूनिट ब्लड चढ़ा दिया गया।
परिजनों ने कई बार डाक्टरों के कैबिन में जाकर उन्हें जगाने की कोशिश की लेकिन किसी ने उनकी एक न सुनी। शुक्रवार तड़के साढ़े चार बजे के करीब राजकुमार ने आइजीएमसी में दम तोड़ दिया।
राजकुमार बीसीएस में बेल्ड़िग की दुकान करता था। राजकुमार अपने पीछे बूढे़ मां-बाप, पत्नी और छह और तीन साल के दो बच्चों को बिलखता हुआ छोड़ गया है।
पिता तेजपाल सिंह ने बताया कि अगर डाक्टर लापरवाही न बरतते तो आज उनका बेटा उनके बीच होता।

मृतक युवक के मामा जनरैल सिंह और भाई मनी राम ने बताया कि वीरवार को डाक्टर ने राजकुमार की सर्जरी की। छह बजे तक उसकी हालत सामान्य लग रही थी। डाक्टरों ने बताया कि राजकुमार ने बहुत ज्यादा ब्लड लॉस कर दिया है। इस कारण उसे ब्लड चढ़ना पड़ेगा। देर शाम तकरीबन 8 बजे के बाद जब उसे ब्लड चढ़ाना शुरू किया गया तो उसकी हालत बिगड़ने लगी। परिजनों ने आरोप लगाया कि उस समय डाक्टरों को ड्यूटी पर रहना चाहिए था, लेकिन वे अपने केबिन में सोते रहे। उन्होंने केवल पेन किलर का इंजेक्शन लगाकर अपनी औपचारिकता पूरी कर दी। राजकुमार सुबह 4 बजे तक तड़पता रहा लेकिन किसी ने उसकी सुध नहीं ली। अंत में उसने दम तोड़ दिया।

उधर, डाक्टर ने अपने ऊपर लगे आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि हड्डी टूटने की स्थिति में शरीर में बाहरी और अंदरूनी दोनों तरह से रक्त की क्षति होती है। शाम को युवक का सीटी स्कैन लिया गया जिसकी रिपोर्ट बिल्कुल ठीक थी लेकिन कुछ मरीजों में सर्जरी के बाद एक्यूड पलमनरी थ्रौंबो एंबोलिजम की दिक्कत आ जाती है जिसके लिए रिश्तेदारों को पहले से काउंसिलिंग करके बताया होता है। राजकुमार की हालत बिगड़ने पर उसे आईसीयू शिफ्ट करने के लिए कहा गया लेकिन वहां बेड खाली न होने की वजह से उसे दाखिल नहीं कर पाए।

मामला ध्यान में आया है। परिजनों के आरोपों पर छानबीन होगी। पोस्टमार्टम कर शव को परिजनों के हवाले कर दिया गया है।
डा. रमेश, वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक, आईजीएमसी

परिजनों ने पुलिस में दी शिकायत
मरीज के परिजनों जरनैल सिंह और मणिराम की ओर से पुलिस में इस संदर्भ में लिखित में शिकायत में दी गई है। परिजनों ने आरोप लगाया है कि डाक्टरों की लापरवाही के कारण मरीज की मौत हुई है। लापरवाही बरतने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए।
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