विवादित रहा है बुलेट निकलने का मामला

Shimla Updated Fri, 25 Oct 2013 05:43 AM IST
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शिमला। हिमाचल पुलिस एसोसिएशन के अध्यक्ष रमेश चौहान के 2002 में गवर्नर हाउस में गारद इंचार्ज रहने के दौरान उसके कमरे से बुलेट निकलने का मामला शुरू से ही विवादित रहा है। इसकी जांच 2007 में हुई तो डीएसपी स्तर के एक अफसर ने रिपोर्ट में लिखा कि कारतूस रमेश चौहान के कमरे से नहीं मिले हैं। उस समय पुलिस ने यह रिपोर्ट सरकार और डीजीपी को कार्रवाई के लिए भेजी। कार्रवाई के बजाय मामले को जांच के लिए सीआईडी को सौंप दिया गया। सीआईडी ने वर्ष 2010 में रिपोर्ट में यह लिखकर भेज दिया कि इसमें न ही कोई एफआईआर हुई है और न ही किसी को सजा हुई है, इसलिए इसमें कोई मामला नहीं बनता। इसके बाद शिकायतकर्ता ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखा। इसके बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई। सीबीआई ने मामला लोकल एजेंसी के पाले में डाल दिया। इसके बाद साल 2012 में डीएसपी स्तर के एक अफसर को जांच सौंपी गई। उसने भी पुराना मामला बताया और उसमें सीआईडी की रिपोर्ट का हवाला दिया। इसके बाद एक बार फिर मामला पुलिस अधीक्षक कार्यालय पहुंचा। इसके बाद शुरुआती जांच के बाद वीरवार को मुकदमा दर्ज कर लिया गया।
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कहां से आई बुलेट ?
नियमों के मुताबिक किसी के कमरे का ताला मजिस्ट्रेट और गवाह की मौजूदगी में तोड़ा जाता है, लेकिन इस मामले में पुलिस ने रमेश चौहान की अनुपस्थिति में ताला तोड़ा।। कमरे से तीन कारतूस मिलने का दावा किया गया, लेकिन थाने के रिकार्ड में ऐसा कुछ दर्ज नहीं है। तत्कालीन गारद इंचार्ज और सेक्शन आफिसर ने अपने बयान में कमरे से बुलेट मिलने की बात से इंकार किया है। तो फिर कहां से आई बुलेट ?
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