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आउटसोर्स नहीं होगा पानी और सीवरेज

Shimla Updated Thu, 08 Aug 2013 05:35 AM IST
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शिमला। राजधानी में पीने के पानी और सीवरेज व्यवस्था को आउटसोर्स करने से राज्य सरकार ने इंकार कर दिया है। सरकार ने आईपीएच को ईपीसी (इंजीनियरिंग प्रोक्यूरमेंट कंस्ट्रक्शन) मोड के तहत व्यवस्थाएं करने के आदेश दिए हैं। शहरी विकास विभाग ने आईपीएच को पत्र लिखकर अवगत कराते हुए नए सिरे से डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
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अब प्रारंभिक चरण में पानी और सीवरेज कनेक्शन से महरूम क्षेत्रों में कनेक्टिविटी दी जाएगी। दूसरे चरण में पानी और सीवरेज लाइनों को दुरुस्त किया जाएगा। इसके लिए डीपीआर बनाई जाएगी। डीपीआर मंजूरी के लिए केंद्र सरकार को भेजी जाएगी। वर्तमान में शिमला में 15 हजार परिवारों की ही सीवरेज कनेक्टिविटी है जबकि करीब 40 हजार घरों को सीवरेज लाइन से जोड़ा जाना है।

शुरू से किया आउटसोर्सिंग का विरोध : महापौर
महापौर संजय चौहान ने कहा कि नगर निगम और आईपीएच मिलकर बेहतर परिणाम दे सकते हैं। इस योजना की आउटसोर्सिंग का वे शुरू से ही विरोध कर रहे थे। उन्होंने कहा कि सरकार इस निर्णय लेने को पांच माह लगा दिए।

पीपीपी मोड को खत्म किया गया : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने कहा कि शहरी विकास विभाग ने ईपीसी मोड पर प्रोजेक्ट को चलाने का जिम्मा आईपीएच को सौंपा है। विभाग ने नगर निगम को पत्र भेजकर सूचित किया है।

मांगें मानने पर आभार जताया
निगम की जल एवं निकाय कर्मचारी यूनियन के महासचिव दिनेश चंद्र नौटियाल ने पीपीपी मोड को रद करने पर राज्य सरकार का धन्यवाद किया है। उन्होंने आईपीएच मंत्री विद्या स्टोक्स, शहरी विकास मंत्री सुधीर शर्मा को निगम कर्मियों की मांगों को अधिमान देने पर आभार जताया है।

...
सीवरेज व्यवस्था सुधारने में खर्च का अनुमान : 54 करोड़ रुपये
पेयजल व्यवस्था दुरुस्त करने पर खर्च का अनुमान : 72 करोड़ रुपये
132 साल पुरानी है शिमला की पानी और सीवरेज व्यवस्था
जवाहर लाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना से होगा सुधार

फ्लैश बैक
- केंद्र सरकार ने 2009 में जल वितरण प्रणाली सुधारने के लिए 72.36 करोड़ का प्रोजेक्ट स्वीकृत किया
- इसी साल 14.47 करोड़ रुपये की किस्त पानी की व्यवस्था सुधारने के लिए निगम को मिली
- 2010 में 54.74 करोड़ की सीवरेज की डीपीआर भी स्वीकृत
इसी साल सीवरेज का कार्य शुरू करने के लिए पहली किस्त के 9.70 करोड़ रुपये जारी
- 2012 तक प्रोजेक्ट शुरू न होने के कारण लागत बढ़ी
- बढ़ी लागत पूरी करने के लिए निजी सहभागिता को शामिल करने का प्रस्ताव 23 अप्रैल 2012 को सदन में पारित
- फैसले के बाद एमसी कर्मचारियों सहित आम लोगों ने व्यवस्था को ठेके पर देने का विरोध किया
- तीन बार टेंडर प्रक्रिया आयोजित करने के बाद सरकार ने 20 मई 2013 को दोबारा टेंडर निकालने के आदेश दिए
- 31 जुलाई को कैबिनेट की बैठक में पीपीपी मोड को रद कर ईपीसी के तहत पेयजल, सीवरेज व्यवस्था देने का फैसला लिया गया

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