राजनीति का अखाड़ा बना गया है आईजीएमसी

Shimla Published by: Updated Fri, 12 Jul 2013 05:32 AM IST
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शिमला। आईजीएमसी अस्पताल महज राजनीति का अखाड़ा बनकर रह गया है। इस खींचतान का असर सीधे तौर पर स्वास्थ्य सेवाओं पर पड़ रहा है। प्रदेश के हर कोने से यहां आने वाले मरीज यहां आकर परेशानियों के चक्रव्यूह में फंसकर रह जाते हैं। किसी को आपरेशन की डेट का इंतजार है तो किसी को डाक्टर का, तो कोई बेड के इंतजार में स्ट्रेचर पर लेटा पड़ा है। संस्थान को चलाने और मरीजाें की देखभाल की जिम्मेदारी संभाले कुछ लोग कर्त्तव्य को भूलकर अपनी सेवाएं राजनीति की भेंट चढ़ा रहे हैं।
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इन दिनों आईजीएमसी में आटोमेशन कमेटी पर सियासत गरमाई हुई है। कमेटी में कॉलेज के आचार्य और सह आचार्य इत्यादि का संगठन सेमडिकोट, रेजिडेंट डाक्टर की एसोसिएशन आरडीए और कर्मचारियों का अलग से संगठन है। इसके अलावा चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों, रोगी कल्याण समिति कर्मचारी और स्टाफ नर्सिज के भी अलग से संगठन हैं। इस कमेटी में शामिल तीन सदस्य टारगेट पर हैं। आरोप है कि यह तीन सदस्य बीजेपी सरकार में भी सदस्य रहे हैं और इन्हें फिर से कांग्रेस सरकार में भी सदस्य रखा गया है। इतना ही नहीं आईजीएमसी कर्मचारी संघ ने कालेज प्रिंसिपल को यहां तक अल्टीमेटम दे दिया कि अगर ऐसा ही चलता रहा तो उन्हें मजबूरन सरकार से आग्रह करना पड़ेगा कि प्राचार्य को पद से हटा दिया जाए। लेकिन यह कर्मचारी संघ खुद विवादों में हैं। मौजूदा कर्मचारी अध्यक्ष एसएस जोगटा पर आरोप है कि उन्होंने सत्ता पलटने के बाद कार्यकारिणी को हथिया लिया। हालांकि इस संघ के अध्यक्ष कर्मचारी नेता रमेश चौहान का कार्यकाल पूरा नहीं हुआ था। इससे बौखलाए रमेश चौहान ने वकील के माध्यम से इस बात के लिए प्रिंसिपल को जिम्मेदार ठहराते हुए कानूनी नोटिस भी भेज दिया है। हालांकि एसएस जोगटा इन आरोपों को नकारते हुए कहते हैं कि वह सर्वसम्मति से चुने गए अध्यक्ष हैं। सेमडिकोट भी प्रबंधन के खिलाफ भड़क गई है। प्रबंधन पर पिक एंड चूज का आरोप लगाया है। इस खींचतान में ज्यादातर वक्त राजनीति की भेंट चढ़ रहा है और अस्पताल का भट्ठा बैठ रहा है।


मरीजों की दांस्ता
उन्हीं की जुबानी
केस नंबर 1
सुबह से बैठा हूं डाक्टर के इंतजार में
हमीरपुर से यहां उपचार के लिए पहुंचे नरेश का कहना है कि वह चोटिल हो गया था। तीन महीने पहले आईजीएमसी में आपरेशन हुआ और टांग में रॉड डली। तीन दिन पहले फिर से दिक्कत हुई। गाड़ी में अपने दो साथियों के साथ यहां आया। सुबह से आपरेशन थियेटर के बाहर बैठा हूं। दोपहर के पौने दो बज गए हैं। आपरेशन थियेटर से कोई जवाब नहीं आया। गाड़ी अस्पताल से दूर खड़ी कर रखी है। रात को उसी में जाकर सो जाते हैं।

केस नंबर 2
यहां भगवान दुश्मन को भी न लाए
बिलासपुर घुमारवीं के रहने वाले प्रकाश चंद ने कहा कि यहां कोई पूछने वाला कोई नहीं। पंद्रह दिन हो गए हैं। आपरेशन कई बार टला। आज हो रहा है। यहां तो भगवान दुश्मन को भी न लाए।

केस नंबर 3
यहां से हिले तो हो जाओगे गुम
कुल्लू से निम्मो देवी अपने पति और तीन बेटियों प्रभा देवी (12), पद्मा देवी (9) और कृष्णा देवी (7) के साथ सुबह ही पहुंचीं। तीनों बेटियों की आंखों में दिक्कत हैं। ढाई बज गए हैं। निम्मो देवी अपनी तीन बेटियों के साथ पर्ची काउंटर के पास फर्श पर बैठी है। आने-जाने वालों में अपने किसी परिचित का चेहरा पहचानने की कोशिश कर रही है। पूछने पर बताया कि पति को डाक्टर ने कहीं परची लेकर भेजा है। पहली बार आए हैं। यहां कुछ पता नहीं चल रहा। पति ने कहा है यहां से हिलना मत वरना गुम हो जाओगे।

केस नंबर 4
तब तक स्ट्रेचर ही रहो
स्ट्रेचर पर चंबा के किहार की रहने वाली साबा (45) खाना खा रही थी। आसपास दो युवक हनीफ मोहम्मद और मोहम्मद हुसैन खडे़ हैं। बताया कि सर्जरी होनी है। पंद्रह दिन टांडा में दाखिल थे। अब यहां भेजा है। बुधवार रात दस बजे यहां पहुंचे। वीरवार को मरीज ओपीडी में दिखाया। बताया गया कि बेड नहीं है। जब तक बिस्तर नहीं मिलता तब तक आपातकालीन वार्ड में स्ट्रेचर पर ही रहो।

सेमडिकोट की नाराजगी दूर : प्रिंसिपल
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि उन्हें कानूनी नोटिस मिला है। सेमडिकोट की कुछ नाराजगी थी उसे दूर कर दिया है। पिक एंड चूज पालिसी नहीं अपनाई जा रही है। आईजीएमसी और टांडा कालेज में डाक्टरों के संयुक्त कैडर के वह बिल्कुल पक्षधर नहीं हैं। न ही ऐसा उन्होंने कहा है। वह किसी भी चीज को राजनीति नहीं बल्कि कार्य क्षमता से जोड़कर देखते हैं।

इनसेट
प्रिंसिपल नहीं सरकार की ओर से बनी है कमेटी
जिस आटोमेशन कमेटी पर यह बवाल मचा है, उस कमेटी के सदस्यों की सूचना सरकार की ओर से जारी हुई है। इसमें आरोपों के घेरे में प्रिंसिपल को लिया जा रहा है। अधिसूचना मुख्य स्वास्थ्य सचिव की ओर से जारी हुई है। इसमें चेयरमैन वाइस प्रिंसिपल आईजीएमसी, सदस्य डा. संजीव शर्मा, डा. राजेश कश्यप, डा. राजेश भवानी, डा. पीयूष कपिला, डा. राजेश गुलेरिया, अरुणिमा और भूपेश को सदस्य रखा गया है।

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