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पेड़ों की कीमतों को दोबारा तय करें

Shimla Updated Tue, 12 Feb 2013 05:31 AM IST
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ददाहू (सिरमौर)। रेणुका बांध जनसंघर्ष समिति ने पेड़ों की कीमतों को लेकर आपत्ति जताई है। सोमवार को संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने संयोजक प्रताप तोमर की अध्यक्षता में बांध परियोजना के महाप्रबंधक बीके कौशल से मुलाकात की। इस अवसर पर समिति ने रोष जताते हुए कहा कि विस्थापितों को भूमि की जो मुआवजा राशि अदा की जा रही है उसमें पेड़ों की कीमतें दुरुस्त नहीं है।
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प्रताप तोमर ने कहा कि विस्थापितों की भूमि पर लगे आंवला, बिल, आम, शिंबल और तूनी के विशाल वृक्षों को कोकाट में दर्शाया है और विस्थापितों को कोकाट की कीमत ही दी जा रही है। आम और तूनी इमारती लकड़ी की श्रेणी में आते हैं। विस्थापितों ने आरोप लगाया कि फलदार वृक्षों का मूल्यांकन करने के लिए उद्यान विभाग का कोई भी अधिकारी उनके पास नहीं आया। फलदार वृक्षों का मूल्यांकन वन विभाग की बजाए उद्यान विभाग के अधिकारियों से करवाया जाना चाहिए था। समिति ने मांग की है कि वृक्षों की दरों को संशोधित करवाकर विस्थापितों को मुआवजा राशि अदा की जाए।

बांध परियोजना के महाप्रबंधक बीके कौशल ने समिति की समस्याओं पर गौर करते हुए कहा कि वृक्षों का उचित मुआवजा विस्थापितों को दिलवाया जाएगा। साथ ही वृक्षों की प्रजातियों को भी दुरुस्त करवाएंगे। प्रतिनिधिमंडल में समिति के अध्यक्ष योगेंद्र कपिला, उपाध्यक्ष सुनील दत्त, सचिव संजय चौहान, सलाहकार देव प्रकाश के अतिरिक्त मस्त राम, वीरेंद्र सिंह, राजेंद्र सिंह और गोविंद उपस्थित थे।

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