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एमसी बजट में लग सकता है जोर का झटका

Shimla Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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शिमला। आर्थिक तंगी से गुजर रहा नगर निगम 2013-14 के बजट को बनाने की तैयारियों में जुट गया है। निगम इस बार लुभावना बजट पेश करेगा, इसकी गुंजाइश कम ही है। घाटे से उबरने के लिए आम शहरी पर कर थोपना नगर निगम की मजबूरी है। ऐसे में अप्रैल 2013 से आम शहरी को अपनी जेब और ढीली करने के लिए तैयार हो जाना चाहिए।
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फरवरी अंत या मार्च पहले सप्ताह में नगर निगम बजट पेश करेगा। इसको लेकर तैयारियां शुरू हो गई हैं। बीते शुक्रवार को महापौर संजय चौहान के आफिस में देर शाम तक निगम अधिकारियों ने बजट को लेकर माथापच्ची की है। आने वाले दिनों में और अधिक प्री बजट मीटिंग होने की संभावना है। निगम सूत्रों की मानें तो आम शहरी पर आर्थिक बोझ डालने की कवायद शुरू हो गई है। निगम की माली हालत चिंताजनक है। 2012-13 में हाउस टैक्स और प्रापर्टी टैक्स की एवज में एक भी रुपया निगम के खजाने में नहीं पहुंचा है। ढाई करोड़ की मासिक तनख्वाह देने को नगर निगम अपनी कई जमा पूंजियों को तुड़वा चुका है। निगम की देनदारियां भी बढ़ती जा रही हैं जबकि आय के साधन सीमित हैं। सूत्रों की मानें तो बजट राशि का बढ़ाया भी जा सकता है ताकि खर्चों को आसानी से एडजस्ट किया जा सके।

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महापौर की होगी परीक्षा
शहर के आम लोगों की समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद कर नगर निगम महापौर की कुर्सी तक पहुंचे संजय चौहान की बजट पेश करने पर असल परीक्षा होगी। शहर की बुनियादी सुविधाओं को लेकर संघर्ष कर चुके संजय चौहान क्या अब आम आदमी की जेब ढीली करेंगे या निगम को पटरी पर लाने के लिए कोई और तिकड़म लगाएंगे?

औंधे मुंह गिरे चुनावी साल के सपने
नगर निगम के चुनावी साल 2012-13 का बजट 110 करोड़ पेश किया गया था जबकि वार्षिक व्यय ढाई सौ करोड़ का बताया गया। दस विभिन्न तरीकों से आय अर्जित करने की बात कही गई। कर शाखा से 15 करोड़, संपदा शाखा से 10 करोड़, वास्तुक-योजनाकार शाखा से 12 करोड़, जल वितरण एवं निकास विभाग से 12 करोड़, मार्ग एवं भवन विभाग से 27 लाख, स्वास्थ्य विभाग से 94 लाख, वन विभाग से पांच लाख, लेखा शाखा, सामान्य शाखा से एक करोड़, राजस्व/पूंजीगत अनुदान से 57 करोड़ की आय होने की बात कही गई। लेकिन दुर्भाग्यवश साल के अंत तक निगम तय आय को छूने से कहीं पीछे छूट गया।

70 करोड़ के बजट में 195 करोड़ खर्च
2011-12 में नगर निगम ने 70 करोड़ का बजट पेश करते वक्त करीब 195 करोड़ का खर्च दर्शाया था। निगम प्रशासन ने बताया था कि 112.25 करोड़ आईपीएच और 7.91 करोड़ रुपये की राशि स्ट्रीट लाइटों की एवज में बिजली बोर्ड को दी जानी है।

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