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शहर में अब रात को नहीं सताएगा अंधेरा

Shimla Updated Sun, 10 Feb 2013 05:31 AM IST
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शिमला। राजधानी में रात के समय स्ट्रीट लाइटों के अभाव में ठोकरें खाने के लिए लोगों को अब मजबूर नहीं होना पड़ेगा। नगर निगम और बिजली कंपनी के अधिकारियों ने स्ट्रीट लाइटाें के रखरखाव के लिए एक कमेटी बनाने का फैसला लिया है। सरकार की मंजूरी के बाद स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त रखने के लिए सामान कमेटी की सिफारिश पर खरीदा जाएगा। इसका उद्देश्य शहर में खराब पड़ी करीब 1100 लाइटों को दुरुस्त करना और भविष्य में खराब होेने वाली लाइटों को तय समय में ठीक करना है। निगम आयुक्त अमरजीत सिंह का कहना है कि लोगों को बेहतर सेवाएं देने के लिए प्रस्ताव तैयार किया जा रहा है।
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शिमला शहर में करीब 1100 स्ट्रीट लाइटें खराब हैं। शाम ढलते ही शहर के कई रास्ते जोखिम भरे हो जाते हैं। बिजली कंपनी की लचर कार्यप्रणाली के चलते शिमला के लोग अंधेरे में ठोकरें खाने को मजबूर हैं। जंगलों से सटे वार्डों के कई मार्गों में बीते पांच साल में स्ट्रीट लाइटों की सुध तक नहीं ली गई है। शहर के बीचोंबीच के वार्डों को छोड़ दें तो हालत बदतर हैं। नगर निगम द्वारा स्ट्रीट लाइटों की स्थिति को जांचने के लिए किए गए सर्वे में यह बात सामने आई है जिसे दुरुस्त करने के लिए नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह ने बिजली कंपनी और नगर निगम की एक ज्वाइंट कमेटी बनाने का फैसला लिया है। इस कमेटी में बिजली कंपनी के अधिशासी अभियंता सिटी, अधिशासी अभियंता डिविजन वन और टू को शामिल किया जाएगा। निगम की ओर से कमेटी में आयुक्त स्वयं और एक अधिशासी अभियंता भी शामिल होंगे। राज्य सरकार अगर कमेटी को बनाने का प्रस्ताव पारित कर देती है तो भविष्य में स्ट्रीट लाइटों को ठीक करने और नए प्वाइंटों के सामान खरीदने का काम कमेटी ही करेगी। कमेटी को सामान खरीदने का अधिकार मिलने से तय समय में खरीददारी होगी और अधिक दिनों तक लाइटें खराब भी नहीं रहेंगी।

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इसलिए हो रही दिक्कत
अभी बिजली कंपनी के पास स्ट्रीट लाइटों का सामान खरीदने के अधिकार हैं। लेकिन बिजली कंपनी में एक छोटे से सामान को खरीदने के लिए कई अधिकारियों के पास फाइल ले जानी पड़ती है। छह माह तक का समय सामान खरीदने में लग जाता है। जिसका खामियाजा लोगों को रात के समय अंधेरे में ठोकरें खाते हुए भुगतना पड़ता है।
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सालाना दो लाख का सामान खरीदने का अधिकार
बिजली कंपनी के पास अभी सालाना सिर्फ दो लाख की राशि का सामान खरीदने की पावर है। दो लाख की राशि में नाममात्र के लिए ही सामान आ रहा है। इस कारण साल में एक हजार लाइटों की सुध भी नहीं ली जा रही है। आयुक्त ने सरकार से सामान खरीदने की लिमिट को भी बढ़ाने की मांग की है।

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