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देखना जरूर पूरी होंगी एमसी की ये दस मांगे!

Shimla Updated Wed, 26 Dec 2012 05:30 AM IST
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शिमला। वीरभद्र सिंह के मुख्यमंत्री बनने से नगर निगम के महापौर संजय चौहान और उपमहापौर टिकेंद्र पंवर खासे उत्साहित हैं। नगर निगम में माकपा की ऐतिहासिक जीत दर्ज करवाने वाले दोनों जनप्रतिनिधियों को भरोसा है कि वीरभद्र सिंह के सत्ता में आने से एमसी का बेड़ा पार होगा। भाजपा सरकार द्वारा अनसुनी की जा रही निगम की परेशानियों को प्राथमिकता के आधार पर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह दूर करेंगे। महापौर संजय चौहान और उपमहापौर टिकेंद्र पंवर का कहना है नगर निगम को मजबूत करने के लिए राज्य सरकार की अहम भूमिका होती है। छठी बार प्रदेश की बागडोर संभालने वाले मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह शहर की दिक्कतों और यहां किए जाने वाले विस्तार की संभावनाओं से अच्छे खासे परिचित हैं। मुख्यमंत्री होने के साथ-साथ वीरभद्र सिंह नगर निगम के एसोसिएट सदस्य भी हैं। ऐसे में आने वाले समय में नगर निगम के दिन बहुरेंगें।
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यह हैं नगर निगम की दस बड़ी मांगें

कैपिटल ग्रांट जारी करना
नई दिल्ली और कोलकाता की तर्ज पर कैपिटल ग्रांट की मांग नगर निगम ने बीते लंबे अरसे से करता आ रहा है। तर्क है राजधानी में एमसी होने के नाते सरकार को यहां के लिए विशेष फंडिंग करनी चाहिए।

यातायात व्यवस्था में सुधार
शहर में बढ़ते ट्रैफिक के चलते यातायात व्यवस्था में व्यापक सुधार किए जाने की दरकार है। शहर के बीच से वाहनों की संख्या कम करने के लिए नए बाईपास बनाने पड़ेंगे।

पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना
ऐतिहासिक शहर शिमला को पर्यटन की दृष्टि से विकसित करना आज वक्त की जरूरत बन गई है। नगर निगम को इसमें राज्य सरकार के सहयोग की आवश्यकता है।

बहुमंजिला पार्किंगों का निर्माण करना
शहर में बढ़ती वाहनों की तादाद को देखते हुए यहां बहुमंजिला पार्किंगों की कमी खल रही है। शिमला के लोग सड़क किनारे अपने वाहनों को खड़े करने को विवश हैं।

यूनिट एरिया मेथड में संशोधन
भाजपा द्वारा राज्य में लागू की गई नई टैक्स प्रणाली यूनिट एरिया मेथड में आवश्यक संशोधन की मांग अभी तक पूरी नहीं हो सकी है। इस कारण शहर में अभी टैक्स वसूली ठप हो गई है। एमसी की आर्थिक तंगी का यह एक बड़ा कारण है।

जल शाखा की आउटसोर्सिंग को रद करना
शहर की पेयजल एवं सीवरेज व्यवस्था को भाजपा सरकार ने ठेके पर देने के आदेश दिए हैं। जिसका कर्मियों ने कड़ा विरोध किया है। मेयर का कहना है ठेके पर देने के बजाए निगम को फंड दिया जाए तो स्थिति सुधर जाएगी।

रिक्त पड़े पदों को भरने की अनुमति
नगर निगम में बीते कई वर्षों से नए पदों की भर्ती बंद पड़ी हुई है। हर साल दर्जनों कर्मचारी सेवानिवृत्त हो रहे हैं। जिनकी जगह किसी को नहीं रखा जा रहा। इस कारण कर्मियों पर अतिरिक्त बोझ पड़ गया है।

वन संपदा को एमसी के अधीन करना
राजधानी की वन संपदा की देखरेख का जिम्मा नगर निगम का है। जबकि यहां पेड़ काटने, कटे हुए पेड़ों की बेचने की अनुमति निगम को नहीं है। एमसी का कहना है चौकीदारी के बजाए उन्हें पूरा हक मिलना चाहिए।

अपनी टैक्सियां चलाने की मिले परमिशन
शहर के प्रतिबंधित मार्गों पर एचआरटीसी ने टैक्सियां चलाई हुई हैं। निगम की सड़कों पर दौड़ रही इन टैक्सियों की एवज में एमसी को कोई आय नहीं हो रही है।

एचआरटीसी की लाल बसों में हो भागीदारी
जवाहरलाल नेहरू शहरी नवीनीकरण योजना के तहत शहर में चल रही लाल बसों की आय का शेयर भी एचआरटीसी द्वारा एमसी को नहीं दिया जा रहा है।

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