डाक्टर की पर्ची के आडिट पर आर-पार की जंग!

Shimla Updated Tue, 11 Dec 2012 05:30 AM IST
शिमला। दवा के दंगल में अब डाक्टरों की लिखी पर्ची पर घमासान छिड़ गया है। पर्ची के आडिट के आदेश पर स्टेट एसोसिएशन आफ मेडिकल एंड डेंटल कालेज टीचर्स, इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने आर-पार की जंग का ऐलान कर दिया है। स्वास्थ्य निदेशक को दो टूक चेतावनी दी गई है कि पहले दवाओं को लेकर राज्य सरकार की गाइडलाइन दिखाओ। उधर, स्वास्थ्य निदेशक डा. डीएस चंदेल अपने कहे पर कायम हैं। उन्होंने कहा कि आडिट होकर रहेगा। निदेशक ने हालांकि यह भी माना कि डाक्टर क्या दवा लिखें, इसके लिए कोई पालिसी नहीं है। सेमडिकोट के महासचिव डा. राजेश कश्यप ने कहा कि आडिट हमेशा संस्थान का होता है न कि डाक्टर की लिखी पर्ची का। राज्य सरकार की ओर से ऐसी कोई पालिसी नहीं बनी है जिसमें यह दर्शाया गया हो कि डाक्टर कौन सी दवा लिखें और कौन सी नहीं। ऐसे में स्वास्थ्य निदेशक के निर्देशों का क्या औचित्य है?
उल्लेखनीय है कि बीते शुक्रवार को स्वास्थ्य महकमे ने मरीज की पर्ची पर लिखी गई प्रिसकिप्शन के आडिट करने के आदेश जारी किए हैं। सभी सीएमओ को लिखित में यह निर्देश दिए गए। सीएमओ इसका आडिट करेंगे और इसकी रिपोर्ट प्रत्येक 45 दिन में निदेशालय को सौंपेंगे। सीएमओ को अपनी रिपोर्ट में यह बताना होगा कि उन्होंने कितनी पर्चियों में डाक्टरों की प्रिसकिप्शन गलत पाई और कितने डाक्टरों को नोटिस जारी किया।
-----------

पहले दवाओं की लिस्ट दें, फिर करें आडिट
इंडियन डाक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. अनिल ओहरी ने कहा कि स्वास्थ्य निदेशक पहले यह बताएं कि कौन-कौन सी कंपनियां जेनरिक दवाएं बनाती हैं? जेनरिक दवाओं की लिस्ट पहले स्वास्थ्य निदेशक सभी डाक्टरों को मुहैया करवाएं, इसके बाद डाक्टर की पर्ची का आडिट करने की बात कहें।
--------
ब्रांडेड या जेनरिक
स्वास्थ्य निदेशक डीएस चंदेल ने कहा कि कोई डाक्टर मरीज को फालतू दवा न लिखें। अगर डाक्टर ब्रांडेड दवा भी लिख रहा है तो वह मरीज के लिए सार्थक हो। पर्ची का आडिट सीएमओ ही करेंगे।
-----------
प्राइस कंट्रोल जरूरी : डा. कुलदीप
शिमला प्राइवेट मेडिकल प्रैक्टिशियन एसोसिएशन की अध्यक्ष डा. आशा मढ़िया ने कहा कि दवा के दाम और क्वालिटी के साथ कोई समझौता नहीं होना चाहिए। एसोसिएशन के पूर्व अध्यक्ष डा. कुलदीप ने कहा कि प्राइस कंट्रोल जरूरी है। ब्रांडेड दवा और जेनरिक में काफी अंतर है लेकिन कई दवाओं पर कीमत काफी ज्यादा है। यह गलत है, इस पर नियंत्रण होना चाहिए।
---------
हिमाचल में दवा की बेहतर क्वालिटी : स्टेट ड्रग कंट्रोलर
स्टेट हेल्थ कंट्रोलर नवनीत मरवाह ने कहा कि हिमाचल में दवा उद्योग मूल रूप से 2004 के बाद स्थापित हुए। 2003 के बाद रिवाइज्ड शेड्यूल एम के तहत ही 29 पेज का परफार्मा भरा जाता है। हर विवरण को जांचने के बाद ही लाइसेंस जारी किया जाता है। हिमाचल में बन रही दवा बेहतर क्वालिटी की वजह से ही दुनिया भर में सप्लाई हो रही हैं।

Spotlight

Most Read

Lucknow

ब्राइटलैंड स्कूल दो दिन के लिए बंद, छात्रा हुई जुवेनाइल कोर्ट में पेश

राजधानी के ब्राइटलैंड स्कूल में छात्र को चाकू मारने की घटना के बाद बच्चों में बसे खौफ को दूर करने के लिए स्कूल को दो दिनों के लिए बंद कर दिया है।

19 जनवरी 2018

Related Videos

बॉलीवुड की टॉप हीरोइनों ने करवाई प्लास्टिक सर्जरी, बताइए कौन है सबसे हसीन ?

बॉलीवुड में कुछ सालों से प्लास्टिक सर्जरी करवा कर फीचर्स को और शार्प और सुंदर करने का चलन चल पड़ा है।

19 जनवरी 2018

  • Downloads

Follow Us

Read the latest and breaking Hindi news on amarujala.com. Get live Hindi news about India and the World from politics, sports, bollywood, business, cities, lifestyle, astrology, spirituality, jobs and much more. Register with amarujala.com to get all the latest Hindi news updates as they happen.

E-Paper