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आचार संहिता में खुद ढोने होंगे गैस सिलेंडर!

Shimla Updated Fri, 12 Oct 2012 12:00 PM IST
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शिमला। आचार संहिता तक भूल जाइए कि गैस एजेंसी से कोई मजदूर आपके घर सिलेंडर छोड़ने आएगा। ढुलाई के दाम बढ़ाने की मांग को लेकर हड़ताल पर गए मजदूरों का मेहनताना फिलहाल बढ़ने वाला नहीं। जिला उपायुक्त डा. अरुण कुमार शर्मा का कहना है कि मजदूरों का मेहनताना बढ़ाए जाने की प्रक्रिया पूरा कर ली गई थी लेकिन आचार संहिता के चलते रेट नहीं बढ़ाए जा सकते। चुनाव आयोग ने गैस सिलेंडरों से संबंधित जानकारी मांगी है, जिसे भेज दिया गया है।
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गैस एजेंसियों के अधीन काम करने वाले मजदूरों ने हड़ताल के दौरान एजेंसी के माध्यम से गैस उठाना बंद कर दिया है। एक सप्ताह से उपभोक्ताओं को घर द्वार गैस सिलेंडर की सप्लाई नहीं हो रही है। गैस एजेंसियाें के तहत काम करने वाले मजदूर सिलेंडर ढुलाई का रेट 25 रुपये से बढ़ाने की मांग कर रहे हैं। गैस एजेंसियों ने इस बाबत जिला प्रशासन से मांग उठाई थी। प्रशासन ने केंद्र सरकार द्वारा पहाड़ी राज्यों को दी जा रही 8 रुपये की विशेष मजदूरी को देने के लिए एजेंसियों को कहा। लेकिन गैस एजेंसियों ने केंद्र सरकार के इस तरह के किसी भी आदेश को सिरे से नकारते हुए 8 रुपये की राशि को गोदाम तक गैस पहुंचाने की मजदूरी बताकर गेंद फिर प्रशासन के पाले में फेंक दी। उधर, मेहनताना नहीं बढ़ने से गुस्साए मजदूर हड़ताल पर हैं। प्रशासन को मजदूरों की हड़ताल की एक सप्ताह बाद भी कोई जानकारी नहीं है। गैस एजेंसियों में उपभोक्ताओं को सेल्फ की पर्चियां काटकर थमाई जा रही हैं। घरों तक गैस पहुंचाने से गैस एजेंसियां इनकार करते हुए स्वयं सिलेंडर लेकर जाने की सलाह दे रहे हैं।

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एजेंसियों में उमड़ रही भीड़
शहर की गैस एजेंसियों में रोजाना गैस की सप्लाई लेने वाले सैकड़ों उपभोक्ता पहुंच रहे हैं। मजदूर उपलब्ध नहीं करवाने की बात को लेकर एजेंसी संचालकों से उपभोक्ताओं की तीखी नोकझाेंक भी हो रही है।
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गैस एजेंसियों का सियासी कनेक्शन
राजधानी में चल रही अधिकांश गैस एजेंसियाें के सियासी कनेक्शन हैं। पूर्व मंत्रियों, पूर्व विधायकों से लेकर भाजपा और कांग्रेस में रुतबा रखने वाले नेताओं के रिश्तेदार यह गैस एजेंसियां चला रहे हैं। ऐसे में जिला प्रशासन पर भी इन एजेंसी संचालकों का खासा रौब है। प्रदेश में चुनावी बेला के चलते अफसर भी इन सियासी कनेक्शन वालों पर हाथ डालने से गुरेज कर रहे हैं।

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