गैस सिलेंडर में लाखों का गोलमाल!

Shimla Updated Fri, 05 Oct 2012 12:00 PM IST
शिमला। गैस सिलेंडर में लाखों रुपये के गोलमाल के संदेह में गैस एजेंसियां आ गई हैं। मजदूरी के आठ रुपये दबाकर लाखों रुपये की हेरफेर के इल्जाम हैं। यह आठ रुपये आपकी जेब से तो मजदूर के लिए जाते हैं पर पहुंचते नहीं हैं। सिटी में हर माह लगभग 45 हजार घरेलू गैस सिलेंडर की खपत है। आठ रुपये के हेरफेर से हर माह साढ़े तीन लाख रुपये का गोलमाल हो रहा है जबकि जिले की बात करें तो हर माह अस्सी हजार घरेलू सिलेंडर की खपत होती है। इस हिसाब से हर माह शिमला जिला में गैस एजेंसियां करीब छह लाख चालीस हजार रुपये डकार रही हैं।
केंद्र सरकार ने पहाड़ी राज्यों में सिलेंडर ढुलाई के लिए मजदूरों को अलग से आठ रुपये प्रति सिलेंडर देने की व्यवस्था की है। यह आठ रुपये सिलेंडर की कीमत में पहले ही जोड़ दिए गए हैं। यानी यह आठ रुपये सिलेंडर की कीमत में इन बिल्ड हैं लेकिन गैस एजेंसी संचालक इस पैसे को मजदूरों तक नहीं दे रहे हैं और न ही मजदूर इससे वाकिफ हैं।
जिला प्रशासन का कहना है अभी ढुलाई 25 रुपये है। अगर गैस एजेंसी मालिक आठ रुपये इन्हें दे देते हैं तो प्रति सिलेंडर 33 रुपये ढुलाई निर्धारित हो जाएगी। इससे उपभोक्ताओं की जेब पर भी कोई असर नहीं पड़ेगा और मजदूरों को उनका जायज हक मिल जाएगा। इस खुलासे के बाद गैस एजेंसी संचालकों में हड़कंप है। अपने बचाव में संचालक केंद्र सरकार की ओर से जारी किए गए इस तरह के निर्देश को नकार रहे हैं और आठ रुपये की राशि को सिलेंडर की कीमत में इन बिल्ड होने से इनकार कर रहे हैं।
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अपने ही जाल में फंसे
शहर में रसोई गैस सिलेंडरों के ढुलाई रेट बढ़ाने के मसले पर गैस एजेंसी संचालक खुद ही फंसते नजर आ रहे हैं। जिला प्रशासन के सामने जोरशोर से ढुलाई के रेट में वृद्धि करने का पासा उल्टा उन्हीं पर पड़ने लगा है। प्रशासन ने इनके द्वारा दिए गए प्रस्ताव का जब प्रारूप तैयार करना शुरू किया तो केंद्र सरकार द्वारा पहाड़ी राज्य में आठ रुपये की मजदूरी अलग से देने की जानकारी हाथ लगी है।
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जिलाधीशों को भेजा था पत्र
खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले विभाग के निदेशक ने 2008 में प्रदेश के सभी जिला उपायुक्तों को पत्र भेजकर गैस ढुलाई करने वाले मजदूरों को आठ रुपये अलग से मजदूरी दिए जाने को सुनिश्चित करने के लिए कहा था। पत्र में कहा गया था कि पहाड़ी राज्यों में केंद्र सरकार ने यह विशेष प्रावधान किया है। इसे सुनिश्चित किया जाए।
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सभी पक्षों की पड़ताल : उपायुक्त
जिला उपायुक्त डा. अरुण शर्मा का कहना है कि मामला जिला खाद्य नागरिक आपूर्ति एवं उपभोक्ता मामले के लिए नियंत्रक के ध्यानार्थ है। सभी पक्षों को ध्यान में रखते हुए कार्रवाई की जाएगी।
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इन बिल्ड मजदूरी ने उलझाया
पहाड़ी राज्यों में सिलेंडर ढुलाई के लिए क्या आठ रुपये की राशि सिलेंडर के रेट में इन बिल्ड है या इसे सिलेंडर की कीमत से बाहर रखा गया है। इस सवाल ने जिला प्रशासन को उलझाकर रख दिया है। एक गैस कंपनी ने तो बाकायदा पत्र लिखकर इसे सिरे से खारिज कर दिया है। लेकिन साल 2008 में निदेशक द्वारा जारी पत्र को आधार मानकर प्रशासन इस मामले की खोज में जुट गया है।

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