रविवार को प्रतिपदा और पूर्णमासी का श्राद्ध

Shimla Updated Thu, 27 Sep 2012 12:00 PM IST
शिमला। श्रद्धा भाव के साथ दिवंगत पूर्वजों को स्मरण करने का पर्व श्राद्ध 30 सितंबर से शुरू होगा। 3 अक्तूबर को कोई श्राद्ध नहीं होगा। 15 अक्तूबर तक श्राद्ध चलेंगे। इस बार तृतीया तिथि का श्राद्ध 2 अक्तूबर को होने और चतुर्थी तिथि 4 अक्तूबर को 4:30 मिनट तक होने के कारण 3 अक्तूबर को श्राद्ध नहीं होगा। आचार्य नंदलाल भारद्वाज के अनुसार 30 सितंबर को प्रतिपदा व पूर्णमासी का श्राद्ध होगा। पहली अक्तूबर को द्वितीया व 2 अक्तूबर को तृतीया का श्राद्ध होगा। 3 तारीख को श्राद्ध तो नहीं होगा लेकिन लोग श्रद्धा पूर्वक पितरों को याद कर तर्पण व दान पुण्य कर सकते हैं। उन्हाेंने बताया कि श्राद्धों के दौरान देव कार्य पूर्वाह्न दोपहर 12 बजे से पहले व पितृ कार्य 12 बजे के बाद किए जाने चाहिए।

क्यों किए जाते हैं श्राद्ध
आचार्य सीताराम भारद्वाज बताते हैं कि भारतीय संस्कृति के अनुसार पितृ पक्ष में विद्वान जरूरतमंद ब्राह्मणों को करवाए गए भोजन व दान से पितर संतुष्ट होते हैं और सुख एवं धन धान्य का आशीर्वाद देते हैं। पितृ पक्ष में श्राद्ध न करने वालों को पितर श्राप देते हैं, यह धारणा गलत है। अपरिहार्य कारण से यदि श्राद्ध न भी कर पाए तो भी पितरों का अपनी संतानों पर आशीर्वाद रहता है।

पितृपक्ष में पूजा अर्चना की विधि
श्राद्ध में परिवार के मुखिया को सूर्य की ओर मुख कर श्रद्धा पूर्वक पितरों का स्मरण करना चाहिए। कुश के साथ जल तर्पण करना चाहिए। ब्र्राह्मणोेें व गरीबों को सामर्थ के अनुसार दूध, दही, घी व शहद से बना भोजन करवाना चाहिए।

कौवे पितरों का प्रतीक
श्राद्ध में कौवे को भोजन देने का विशेष महत्व है। कौवे व पीपल को पितरों का प्रतीक माना जाता है। श्राद्ध पक्ष के दौरान कौवों को भोजन देना खास महत्व रखता है।

क्या करें
मन मस्तिष्क में पवित्र विचार रखें
श्राद्ध पक्ष में आचरण शुद्ध रखें
नमक, गुड़, तिल, चावल, वस्त्र व घी का दान करें
पशु, पक्षियों को भोजन कराएं
गरीबों और ब्राह्मणों को अपने सामर्थ अनुसार दान करें

क्या ना करें
रात्रि के समय श्राद्ध करना वर्जित है
भोजन बनाते हुए मन में क्रोध न रखें
संभव हो तो श्राद्ध कर्ता लोहे के पात्र का प्रयोग न करें
पितरों के प्रति आस्थावान रहें
श्राद्ध कर्म करने वाला व्यक्ति मांस मदिरा का सेवन न करें

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