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इन्हें हेडकांस्टेबल की हाय न लगे!

Shimla Updated Mon, 27 Aug 2012 12:00 PM IST
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शिमला। पुलिस महकमा हेडकांस्टेबल से ड्यूटी ले रहा है या इन्हें सजा दे रहा है? 12 से 16 घंटे की ड्यूटी। न कोई रेस्ट और न ही साप्ताहिक अवकाश। देर रात जब घर पहुंचो तो बच्चे सो जाते हैं और जब वे जगते हैं तो हेडकांस्टेबल साहब फिर ड्यूटी पर तैनात। रात-दिन ड्यूटी में जुटे ये पुलिस कर्मचारी मानसिक अवसाद का शिकार भी होने लगे हैं।
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थानों और चौकियों की बात तो छोड़ें, ट्रैफिक पुलिस की ड्यूटी बजा रहे जवान भी महकमे की उपेक्षा का शिकार हो रहे हैं। ट्रैफिक पुलिस में कांस्टेबल तो कुछ हद तक राहत पा रहे हैं लेकिन हेडकांस्टेबल का हाल ठीक नहीं। महकमा इन्हें जांच अधिकारी की श्रेणी में रखता है और इलाके में गाड़ियों के चालान काटने की पावर भी दी है। एक कांस्टेबल अपनी तय ड्यूटी करता है लेकिन हेडकांस्टेबल उसी कांस्टेबल के साथ सुबह आ जाता है। दो बजे कांस्टेबल की ड्यूटी खत्म हो जाती है और दूसरा कांस्टेबल मौके पर पहुंच जाता है। लेकिन हेडकांस्टेबल को दूसरी शिफ्ट में भी तैनात रहना पड़ता है।
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केस वन
बेटी की शादी को भी छुट्टी नहीं
बेटी की शादी में भी महकमे ने बेरुखी दिखाई। एक तरफ पारिवारिक दायित्व की जिम्मेदारी ऊपर से सख्त ड्यूटी। बेटी की शादी नजदीक थी। सारे इंतजाम करने के लिए दो माह का अवकाश चाहिए। अफसर से गुहार लगाई। जवाब मिला विधानसभा ड्यूटी, वीवीआईपी मूवमेंट, इतनी छुट्टी नहीं मिलेगी। ऐसे में मानसिक अवसाद आना स्वाभाविक है। आज डायबिटिज, ब्लड प्रेशर का मरीज हूं। आप बताइए किससे शिकायत करूं?
केस टू
वर्दी धोने तक का टाइम नहीं
एसपी आफिस में सभी 10 से 5 बजे की ड्यूटी करते हैं। सरकारी अवकाश के दिन सबकी छुट्टी। कांस्टेबल से लेकर ऊपर के अफसर तक। लेकिन हमें संडे हो या मंडे ड्यूटी देनी ही है। परिवार की तो छोड़ो, वर्दी धोने तक का टाइम नहीं है। बिना रेस्ट के कैसे दिन रात ड्यूटी दे सकते हैं। सिर्फ सिफारिश वाले बेहतर नौकरी कर रहे हैं, हमें कौन पूछ रहा।

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