पिताजी से रोज आठ बजे बात कर होती थी सुबह

Shimla Updated Tue, 07 Aug 2012 12:00 PM IST
शिमला। पिताजी रोज सुबह आठ बजे मुझे फोन करते। उस वक्त में देश में होता या विदेश में। उनके लिए यह आठ बजे हर जगह पर सवेरे के ही होते। चाहे मैं देश में रहूं या विदेश में। मैं भी उनका फोन कभी न टालता। पिता के चेहरे की भाव-भंगिमाएं बॉलीवुड करियर में भी काम आईं। फिल्मों में भी कई बार निभाया उनके भीतर झांका किरदार... सोमवार को आशियाना में अनुपम खेर की ये बातें साबित कर रही थीं कि वह अपने दिवंगत पिता पुष्करनाथ खेर को हर पल याद करते हैं।
कुछ माह पूर्व उनके पिता पुष्करनाथ का देहावसान हुआ था। अनुपम भले ही शिमला में अभिनय की कार्यशाला और एक्टिंग स्कूल खोलने के बहाने मौजूद हैं, लेकिन उनकी बातें पिता पुष्करनाथ खेर के बारे में थीं। वह पत्रकार वार्ता के मध्य भी रह-रहकर कोई न कोई बात ऐसी करते रहे, जिसमें पिता का जिक्र आता रहा। अनुपम ने पिताजी के नाम भेजा एक चेक भी दिखाया। वह बोले, ये देखो। यह पिताजी निकाल ही नहीं पाए। यह 4880 रुपये का चेक था। पैसे तो इससे भी ज्यादा उन्हें भेजता था। पिता की इस याद को हंसी से ओझल कर अनुपम ने फिर कहा कि मेरे पिता पैसों के शौकीन थे। लोगों में भी पैसे बांटते थे।

ये पन्ने की अंगूठी, ये गले की कंठी मां ने दी
शिमला। अनुपम खेर बोले - ग्रह-गोचर भी तभी ठीक होता है, जब कठिन परिश्रम और ईमानदारी से काम किया जाए। ये जो मैंने पन्ने और काले घोड़े के नाल की अंगूठी लगाई है। गले में ये जो रुद्राक्ष की कंठी है। यह मां ही ने तो दी है। अपनी मां दुलारी खेर को मैं बांबे ले जा रहा हूं। वह अब तक शिमला में थी। मां ने पनीर खिलाया। बीच-बीच में खाने-पीने के बारे में पूछने के लिए ही फोन कर रही हैं। यह प्यार मां से ही मिल सकता है।

फेवरिट एक्टर रॉबर्ट नीरो के साथ मिला काम
शिमला। रॉबर्ट नीरो फेवरिट एक्टर हैं मेरे। हाल ही में टोरंटो इंटरनेशनल फेस्टिवल में गया था, तो उनसे मिलने की चाह में मैंने उनकी कार का 100 फुट तक पीछा किया। संयोग देखिए बाद में उनकी सिल्वर लाइनिंग प्ले बुक फिल्म में काम मिल गया। यह 21 नवंबर को रिलीज हो रही है। इस संदर्भ में अमेरिका जा रहा हूं। बॉलीवुड की तो कई फिल्मों में काम कर रहा हूं। कुछ फिल्में जैसे चश्मे, स्पेशल 26, यमला पगला दीवाना पार्ट टू, शोभना सेवन नाइट्स आदि।

चार हफ्ते के 5 हजार रुपये बहुत नहीं जनाब
शिमला। गेयटी थियेटर में अभिनय कार्यशाला के लिए प्रति व्यक्ति फीस पांच हजार रुपये रखी है। यह बहुत ज्यादा नहीं है जनाब! इतने में तो पीजा-बर्गर का खर्च ही हो जाता है। मुंबई वाले स्कूल में तीन महीने की डेढ़ लाख फीस है। रहना-सहना इसी में होता है। गेयटी थियेटर में कलाकारों के ज्यादा और दर्शकों के कम होने पर अनुपम बोले - उस वक्त भी ऐसी ही हालत थी, जब हम यहां नाटक करते थे। हमें आशावादी होना होगा। हम जल्दी ही एक बड़े नाटक का मंचन प्लान कर रहे हैं।

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