सुबह दवा फिर दिन भर दर्द

Shimla Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
शिमला। आईजीएमसी दर्द निवारक कम, दर्द देने वाला ज्यादा बन गया है। यहां न अल्ट्रासाउंड हो रहे और न ही एक्सरे और ईसीजी। स्ट्रेचर पर मरीज पड़ा है तो पड़ा है। उसकी सुध केवल एक बार तब ली जाती है जब संबंधित विभाग के डाक्टर राउंड पर एक मर्तबा सुबह आते हैं। बिस्तरों की भारी कमी है। कई मरीजों को सप्ताह भर से बिस्तर नहीं।
24 घंटे चलने वाले आपातकालीन विभाग में एक केजुअल्टी मेडिकल अफसर तैनात रहता है। सबसे पहले जो भी मरीज आएगा, यह चेक करेंगे। उसके बाद संबंधित विभाग के डाक्टर को काल करके मरीज के बारे में बताएंगे। मरीज की हालत को देखते हुए अगर जरूरत पड़ी तो अल्ट्रासाउंड, ईसीजी और एक्सरे का परामर्श देते हैं। लेकिन यहां भी अधिकांश समय घंटों इंतजार करना पड़ता है और मरीज तब तक दर्द से कराहता रहता है। सबसे अधिक दिक्कत रात के समय पेश आती है। इस समय हालात और भी बुरे हो जाते हैं। इस अव्यवस्था को आज तक प्रबंधन सुधार नहीं पाया है। आपातकालीन विभाग में सीनियर कंसलटेंट को बैठाने की व्यवस्था प्रबंधन आज तक नहीं कर पाया। जब तक प्रबंधन इसे गंभीरता से नहीं लेता, तब तक मरीज रोजाना ऐसे ही हाल बेहाल होते रहेंगे।
आईजीएमसी के प्रिंसिपल प्रोफेसर एसएस कौशल ने कहा कि हमेशा कोशिश रहती है कि यहां आने वाले मरीजों को बेहतर उपचार दिया जाए। जो कुछ कमियां रह गई हैं, उन्हें शीघ्र दूर करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

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