लीकेज में 30 फीसदी पानी बर्बाद कर रहा शिमला

Shimla Updated Sun, 29 Jul 2012 12:00 PM IST
शिमला। शहर में लोगों को पानी का बिल देने के बावजूद बेशक पेयजल नियमित रूप से नहीं मिलता हो, लेकिन सरकार और नगर निगम के बयान जरूर विरोधाभासी हैं। आईपीएच मंत्री रविंद्र रवि का कहना है कि शिमला शहर की स्थाई आबादी 1.72 लाख और फ्लोटिंग पोपुलेशन करीब 76 हजार है। इस हिसाब से नगर निगम को हर दिन 30 एमएलडी पानी चाहिए। लेकिन आईपीएच विभाग हर दिन औसतन 36 एमएलडी पानी नगर निगम को दे रहा है। फिर भी जरूरत क्यों पूरी नहीं होती? इस सवाल का जवाब लोगों को नगर निगम को देना चाहिए। क्योंकि एमसी पानी के आवंटन को देखता है। वह पीटरहाफ में आयोजित प्रेस वार्ता में बोल रहे थे।
रविंद्र रवि ने दावा किया कि नगर निगम 30 फीसदी पानी को लीकेज में बर्बाद कर रहा है। कांग्रेस शासनकाल के दौरान बनाई गई गिरि परियोजना में पहले लीकेज थी। मंत्री का दावा है कि उन्होंने 91 साइट्स पर खुद दौरा कर यह लीकेज बंद करवाई। अब भेखलटी टैंक तक इस लाइन में कोई लीकेज नहीं है, लेकिन शहर की हालत आज भी खराब है। लीकेज रोकने के लिए लोगाें को भी सहयोग देना चाहिए। उन्होंने कहा कि नगर निगम को पेयजल वितरण की आउटसोर्सिंग पर खुद ही फैसला लेना है। इसमें सरकार का कोई हस्तक्षेप नहीं है। रविंद्र रवि ने कहा कि शिमला शहर की वर्ष 2047 तक पेयजल जरूरत को पूरा करने के लिए आईपीएच विभाग ने 515 करोड़ की एक डीपीआर तैयार कर ली है। इसे केंद्रीय शहरी विकास मंत्रालय को मंजूरी के लिए भेजा जा रहा है। इसमें कोल डैम से पानी शिमला लाने की योजना है। विभाग के आकलन के अनुसार 2047 तक शहर की आबादी 7.75 लाख के करीब हो सकती है। इतनी जनसंख्या को यह स्कीम पर्याप्त पानी देगी। उनके साथ सचिव आईपीएच ओंकार शर्मा और प्रमुख अभियंता आरके शर्मा भी मौजूद थे।

नगर निगम पर 133 करोड़ बकाया
शिमला। रविंद्र रवि से जब यह पूछा गया कि नगर निगम लोगों को सपने दिखा रहा है कि शहर को 24 घंटे सातों दिन पानी दिया जाएगा। क्या ऐसा किया जा सकता है? जवाब में मंत्री ने कहा कि सब कुछ मुमकिन है, लेकिन नगर निगम पहले आईपीएच का बकाया 133 करोड़ रुपया तो अदा करे। इसके बाद सोचेंगे कि क्या किया जा सकता है?

अश्वनी खड्ड के पानी से न डरें
शिमला। रविंद्र रवि ने कहा कि शहर में अश्वनी खड्ड के पानी को लेकर कई बेवजह आशंकाएं हैं। जब नरेंद्र चौहान आईपीएच के प्रधान सचिव थे तो उन्हाेंने अपने घर से सैंपल चेक करवाया। पानी एकदम फिट निकला। इसके बाद आईपीएच, नगर निगम और स्वास्थ्य विभाग अलग अलग सैंपल भरता है। चिंता की कोई बात नहीं है।

जैसे भी हो, शिकायत जरूर करें
शिमला। आईपीएच मंत्री ने कहा कि शिमला में पानी न आए तो कम से कम शिकायत जरूर करें। चाहे ई-समाधान से मुख्यमंत्री या मंत्री को या फिर नगर निगम के रजिस्टर पर इसे दर्ज करवाएं। जब तक शिकायत नहीं होगी, तो सरकार या अन्य निगरानी एजेंसी इसमें क्या करेगी? फोन कर जेई को शिकायत बताने भर से समस्या का स्थाई हल नहीं होगा।

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