काम छोड़ भागने की फिराक में है चीनी कंपनी

Shimla Updated Sat, 21 Jul 2012 12:00 PM IST
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शिमला। प्रदेश के सबसे अहम सेब बाहुल क्षेत्र जुब्बल कोटखाई, हाटकोटी और रोहड़ू क्षेत्र को जोड़ने वाली करोड़ों की बन रही मुख्य सड़क का निर्माण कर रही चाइना की कंपनी ने अपना बोरिया बिस्तर समेटना शुरू कर दिया है। पिछले एक सप्ताह से कंपनी ने अपनी साइट पर जमा निर्माण सामग्री के साथ ही मशीनों और गाड़ियों तक को आधे अधूरे दाम पर बेचना शुरू कर दिया है, जबकि अभी काम सिफ 25 फीसदी भी पूरा नहीं हुआ है। 81 किलोमीटर की ठियोग रोहड़ू वाया हाटकोटी सड़क का काम कर रही यह चीनी कंपनी पहले ही काम को समय सीमा के भीतर पूरा करने में नाकाम रही है। उसने कई तरह के तर्क देकर 2013 तक प्रोजेक्ट पूरा करने का समय ले रखा है, मगर कंपनी जिस तरह से अपना सामान समेट रही है, उससे लग रहा है कि लांगजेन रोड एंड ब्रीज कंपनी प्रोजेक्ट को अधूरा छोड़कर भागने की फिराक है। लोनिवि इस बारे में अभी अनभिज्ञ है। यदि कंपनी ने अपना सारा सामान बेच दिया और रफूचक्कर हो गई तो विभाग और सरकार के हाथ क्या रह जाएगा क्योंकि विभाग को कंपनी ने लिखित में काम छोड़ने की सूचना नहीं दी है।
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करीब तीन सौ करोड़ से अधिक के इस प्रोजेक्ट के तहत हुली और गुम्मा के पास अणु नाला पर बनने वाले मुख्य पुलों की कंपनी ने शटरिंग तक कर दी थी, मगर बीते दिनों कंपनी ने इसकी शटरिंग तक को खोल कर आधे पौने दाम पर बेच दिया है, जिसके लिए शिमला के अलावा अन्य जिलों से कबाड़ी आए थे, जो सामान खरीद कर जा रहे हैं। सूचना तो यहां तक है कि कंपनी ने अपने इस्तेमाल को खरीदी छोटी गाड़ियों को महज 1.25 लाख में बेच दिया। कंपनी सरिया तक बेच रही है। विभाग स्वयं मान रहा है कि अभी तक इस सेब बाहुल क्षेत्र की मुख्य सड़क का ठियोग से लेकर छैला तक ही काम हुआ है, उसमें भी कुछ काम शेष है।
सेब सीजन में फिर दिक्कत झेलने को तैयार रहें बागवान
शिमला। ठियोग-हाटकोटी-रोहड़ू सड़क में हुली से आगे रोहड़ू तक सड़क को चौड़ा करने को कटिंग की गई है, वहीं दो पुलों की सिर्फ शटरिंग ही हो पाई है। ऐसे में सड़क पर आए मलबे के कारण बरसात के सीजन में शुरू होने वाले सेब सीजन में जुब्बल, रोहड़ू, कोटखाई और हाटकोटी के बागवानों के लिए फिर से समस्या खड़ी होने की पूरी संभावनाएं हैं। कीचड़ से सनी सड़कों में गाड़ियों के फंसने की संभावनाएं बनी रह सकती हैं।

सेब आर्थिकी में अहम है क्षेत्र
जिला की 1500 करोड़ की सेब आर्थिकी में जिला शिमला के जुब्बल कोटखाई, रोहड़ू व हाटकोटी क्षेत्र से 40 से 50 फीसदी फसल होती है, जो बेचने को बाहर की मंडियों में जाती है। चीनी कंपनी यदि काम छोड़कर भाग गई तो निश्चित तौर पर प्रदेश सरकार और लोक निर्माण विभाग को सेब सीजन में पेश आने वाली कठिनाइयों को दूर करने में मुश्किलें पेश आ सकती हैं।
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पूर्व सरकार के कार्यकाल में मिला था वर्ल्ड बैंक से बजट
इस 81 किलोमीटर की सड़क को चौड़ा करने और इसमें सुधार करने को पूर्व सरकार के कार्यकाल में वर्ल्ड बैंक से बजट मिला था। भाजपा सरकार ने सत्ता में आने के बाद 228 करोड़ के इस राज्य सड़क परियोजना का शिलान्यास मुख्यमंत्री प्रेम कुमार 15 नवंबर 2008 को किया था। इसके बाद चीन की कंपनी ने भू अधिग्रहण न किए जाने जैसे तर्क देकर इसके पूरा होने की समय सीमा 20 जून 2013 तक बढ़वा दी थी, जिसमें इसका बजट भी बढ़ा दिया गया था।

लोनिवि को सौंपी है सड़क रखरखाव की जिम्मेदारी : एसके गंजू
इस राज्य रोड प्रोजेक्ट के अधिशासी अभियंता एसके गंजू ने कहा कि उन्हें कंपनी के सामान समेटने की अधिकारिक तौर पर कोई सूचना नहीं है। राज्य सरकार और विभाग की प्रोजेक्ट पर पूरी नजर है। अनुबंध के आधार पर कंपनी को एक नोटिस दिया जा चुका है, जिसमें उसके खिलाफ कार्रवाई अमल में लाने को कहा गया है। उन्होंने कहा कि कंपनी जब लिखित में विभाग को सूचित करेगी तो ही माना जाएगा कि कंपनी काम छोड़ रही है। उन्होंने कहा कि प्रोजेक्ट का अभी 25 फीसदी ही काम हो पाया है। उसके आधार पर 25 फीसदी ही भुगतान कंपनी को किया गया है। सड़क को बहाल रखने की जिम्मेदारी लोक निर्माण को सौंपी गई है।
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